बिजली बिल राहत योजना (वन टाइम सेटलमेंट—ओटीएस) के तहत पंजीकरण कराने आ रहे उपभोक्ताओं को गुमराह किए जाने का मामला सामने आने के बाद देवीपाटन मंडल में हड़कंप मच गया है। इस योजना का उद्देश्य बकाया बिजली बिलों से उपभोक्ताओं को राहत देना है, लेकिन शिकायत मिली कि कुछ अधिकारी और संविदा कर्मी उपभोक्ताओं को सही जानकारी नहीं दे रहे थे। बताया गया कि पंजीकरण कराने पहुंचे लोगों को यह कहकर टाल दिया जा रहा था कि वे बाद में बिल जमा करें या योजना का लाभ अभी न लें। इससे कई उपभोक्ता राहत से वंचित रह गए। यह शिकायत विद्युत सखी, जनसेवा केंद्र संचालकों और अन्य माध्यमों से मुख्य अभियंता देवीपाटन मंडल यदुनाथ यथार्थ तक पहुंची, जिसके बाद पूरे मामले की गंभीरता से जांच शुरू की गई।
जांच में उजागर हुई अधिकारियों की लापरवाही
प्राथमिक जांच में सामने आया कि कुछ अभियंता और संविदा कर्मी जानबूझकर उपभोक्ताओं को गलत सलाह दे रहे थे। आरोप है कि उन्हें यह समझाया जा रहा था कि अभी पंजीकरण कराने से कोई खास फायदा नहीं है और बाद में बिल जमा करना बेहतर होगा। इससे न केवल योजना की मंशा पर सवाल खड़े हुए, बल्कि आम लोगों में भ्रम की स्थिति भी पैदा हुई। मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने इसे गंभीर प्रशासनिक चूक मानते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि ओटीएस योजना सरकार की महत्वपूर्ण पहल है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही या उपभोक्ताओं को भ्रमित करने का प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच के बाद दोषी पाए गए अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान की गई।
14 अफसरों को नोटिस, संविदा कर्मियों पर सख्त रुख
कार्रवाई के तहत दो अधिशासी अभियंता, चार उपखंड अधिकारी (एसडीओ) और आठ अवर अभियंता (जेई) को नोटिस जारी किया गया है। इन सभी अधिकारियों को अपनी कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार लाने की कड़ी चेतावनी दी गई है। इसके अलावा देवीपाटन मंडल के 15 से अधिक संविदा कर्मियों को भी नोटिस भेजे गए हैं। चार संविदा कर्मियों की भूमिका को गंभीर मानते हुए उनकी सेवा समाप्त करने की संस्तुति संबंधित संस्था से की गई है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि भविष्य में कोई भी कर्मचारी या अधिकारी उपभोक्ताओं के हितों के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न करे। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि आगे भी ऐसी शिकायतें मिलती हैं तो और कठोर कार्रवाई की जाएगी।
उपभोक्ताओं को सही जानकारी देने पर जोर
मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ओटीएस योजना से जुड़ी सही और पूरी जानकारी हर उपभोक्ता तक पहुंचाई जाए। जनसेवा केंद्रों, बिजली कार्यालयों और फील्ड स्टाफ को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी उपभोक्ता गलत जानकारी के कारण योजना से वंचित न रहे। उन्होंने यह भी कहा कि बिजली विभाग की छवि आम जनता से जुड़ी होती है और ऐसे मामलों से विश्वास कमजोर होता है। विभाग अब निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी कर रहा है, ताकि उपभोक्ताओं को समय पर और पारदर्शी सेवाएं मिल सकें। इस कार्रवाई को एक सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है कि सरकारी योजनाओं में बाधा डालने या लोगों को गुमराह करने वालों पर अब सीधे कार्रवाई होगी।
