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देश की सेवा में गया बेटा… लेकिन तिरंगे में लिपटकर लौटा, मां की चीख सुनकर रो पड़ा पूरा शहर

IAF पायलट पूर्वेश दुरगकर का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर घर पहुंचा तो परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। प्रशिक्षण उड़ान के दौरान हुए विमान हादसे में उनकी मौत हो गई। पढ़ें पूरी भावुक कहानी।

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महाराष्ट्र के नागपुर में उस समय बेहद भावुक माहौल बन गया जब भारतीय वायुसेना के युवा पायलट फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर उनके घर पहुंचा। जैसे ही सेना का वाहन उनके घर के बाहर रुका और तिरंगे में लिपटा ताबूत बाहर लाया गया, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। परिवार के लोग इस दर्दनाक पल को देखकर खुद को संभाल नहीं पा रहे थे। बेटे को तिरंगे में लिपटा देखकर मां बिलख पड़ीं और बार-बार यही कहती रहीं कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा। यह दृश्य इतना भावुक था कि आसपास खड़े लोगों की भी आंखों से आंसू निकल आए। मोहल्ले के लोग, रिश्तेदार और स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में वहां पहुंचे थे ताकि अपने इलाके के इस बहादुर बेटे को अंतिम विदाई दे सकें। हर कोई यही कह रहा था कि देश ने एक साहसी और होनहार जवान को खो दिया है।

प्रशिक्षण उड़ान के दौरान हुआ था दर्दनाक हादसा

जानकारी के अनुसार फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरगकर की मौत एक सैन्य विमान हादसे में हुई। यह दुर्घटना उस समय हुई जब भारतीय वायुसेना का लड़ाकू विमान प्रशिक्षण मिशन पर था। उड़ान के दौरान अचानक तकनीकी समस्या आने की वजह से विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे के बाद बचाव दल तुरंत मौके पर पहुंचा, लेकिन पायलटों को बचाया नहीं जा सका। इस खबर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। वायुसेना ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि हादसा किन कारणों से हुआ। सैन्य अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के मामलों में विस्तृत तकनीकी जांच की जाती है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। इस हादसे के बाद वायुसेना और प्रशासन ने शहीद पायलट के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और कहा कि देश उनके बलिदान को हमेशा याद रखेगा।

बचपन से था आसमान में उड़ान भरने का सपना

पूर्वेश दुरगकर बचपन से ही आसमान में उड़ान भरने का सपना देखते थे। परिवार के लोगों के मुताबिक, उन्हें बचपन से ही विमान और वायुसेना से जुड़ी चीजों में गहरी दिलचस्पी थी। पढ़ाई के दौरान उन्होंने ठान लिया था कि वे भारतीय वायुसेना में शामिल होकर देश की सेवा करेंगे। कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने यह सपना पूरा किया और फाइटर पायलट बने। उनके परिवार को उन पर हमेशा गर्व रहा। पड़ोसियों का कहना है कि पूर्वेश बेहद विनम्र और मिलनसार स्वभाव के थे। जब भी छुट्टी पर घर आते थे तो इलाके के लोगों से मिलते-जुलते और बच्चों को भी बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करते थे। परिवार को उम्मीद थी कि उनका बेटा देश की सेवा करते हुए ऊंचाइयों तक पहुंचेगा, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

पूरे सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

जब पूर्वेश दुरगकर के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। भारतीय वायुसेना के जवानों ने उन्हें पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी। तिरंगे में लिपटे ताबूत को देखकर लोगों ने “भारत माता की जय” और “शहीद अमर रहें” के नारे लगाए। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, प्रशासनिक अधिकारी और सेना के जवान मौजूद थे। यह पल परिवार के लिए बेहद कठिन था, लेकिन उन्हें इस बात का गर्व भी था कि उनका बेटा देश की सेवा करते हुए शहीद हुआ। लोगों का कहना है कि ऐसे जवानों की वजह से ही देश सुरक्षित है। पूर्वेश दुरगकर की बहादुरी और देशभक्ति की कहानी आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।

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