आईएएस संतोष वर्मा एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। पहले आरक्षण को लेकर ‘ब्राह्मण की बेटी’ वाली दलील देकर विवादों में घिरे वर्मा का नया वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में संतोष वर्मा मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (अजाक्स) के मंच से भीम आर्मी के प्रमुख सांसद चंद्रशेखर आजाद की तारीफ करते हुए नजर आ रहे हैं। मंच से उन्होंने चंद्रशेखर का कथित बयान दोहराते हुए कहा, “कितने संतोष वर्मा मारोगे, हर घर से संतोष वर्मा निकलेगा।” यह बयान ऐसे समय में आया है जब सरकार पहले ही उन्हें नोटिस जारी कर चुकी है और उनके खिलाफ कार्रवाई की संभावना बनी हुई है।
कार्यक्रम में विवादित शब्दों का इस्तेमाल
संतोष वर्मा ने अजाक्स भवन के लोकार्पण और प्रांतीय अध्यक्ष चुने जाने के मौके पर मंच से चंद्रशेखर आजाद की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “भीम आर्मी के जो हमारे चंद्रशेखर रावण जी हैं, बहुत अच्छे समाजसेवी हैं और समाज के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं।” इसके बाद वर्मा ने आगे कहा, “कितने संतोष वर्मा को तुम मारोगे, कितने संतोष वर्मा को तुम जलाओगे, कितने संतोष वर्मा को तुम निगल जाओगे। अब हर घर से एक संतोष वर्मा निकलेगा। और जब हर घर से एक संतोष वर्मा निकलेगा, तो आपके पास इतनी ताकत नहीं कि आप हर संतोष वर्मा को जला सको।” उनके इस बयान ने न केवल सरकारी नियमों और शिष्टाचार की सीमाओं को चुनौती दी है बल्कि समाज और प्रशासन में भी हलचल मचा दी है।
बयान को लेकर मिल चुका है नोटिस
संतोष वर्मा के इस बयान को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ गई है। पहले ही वर्मा को आरक्षण से संबंधित विवादित टिप्पणी पर नोटिस मिल चुका है, ऐसे में उनके इस नए बयान को गंभीर माना जा रहा है। अधिकारी संघ और सरकारी सर्कुलर के मुताबिक, कोई भी अधिकारी सार्वजनिक मंच से ऐसी टिप्पणियाँ नहीं कर सकता, जो राजनीतिक रूप से संवेदनशील हों। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्मा का यह बयान सेवा नियमों का उल्लंघन कर सकता है और इसके चलते उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना भी बन सकती है।
विवादों में आया बयान
संतोष वर्मा का वायरल वीडियो सोशल मीडिया और मीडिया चैनलों पर तेजी से चर्चा में है। लोगों की प्रतिक्रियाएं मिश्रित हैं; कुछ लोग इसे साहसिक बयान मान रहे हैं, तो कई इसे प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन बता रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि आईएएस अधिकारी और राजनीतिक बयानबाज़ी के बीच की सीमा अब भी चर्चा का विषय बनी हुई है। साथ ही, इस घटना ने यह भी दिखाया कि सरकारी पद पर रहते हुए सार्वजनिक मंच पर क्या कहा जाना चाहिए और क्या नहीं, इस पर सतर्क रहना कितना महत्वपूर्ण है।
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