आगरा में आज उस समय माहौल गरमा गया जब सीएम योगी आदित्यनाथ के दौरे से ठीक पहले किसानों ने बड़ा ऐलान कर दिया। भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को लेकर लंबे समय से नाराज चल रहे किसानों ने साफ कहा है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, वे मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उतरने नहीं देंगे। यह चेतावनी भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) और अन्य किसान संगठनों की पंचायत के बाद सामने आई। किसानों का कहना है कि उन्हें उनकी जमीन का पूरा मुआवजा और उस पर ब्याज अभी तक नहीं मिला है, जिससे उनमें भारी आक्रोश है।
ग्रेटर आगरा परियोजना के शिलान्यास से पहले बढ़ा विवाद
दरअसल, सीएम योगी आज आगरा में एक बड़ी परियोजना—ग्रेटर आगरा विकास योजना—का शिलान्यास करने पहुंच रहे हैं। इस योजना के तहत रायपुर रहनकला क्षेत्र में करीब 10 आधुनिक टाउनशिप विकसित की जानी हैं, जिन पर लगभग 5142 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। सरकार का दावा है कि यह परियोजना शहर के विकास को नई दिशा देगी और आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी। लेकिन दूसरी ओर, जिन किसानों की जमीन इस परियोजना के लिए ली गई है, वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि विकास की कीमत वे अपनी जमीन देकर चुका रहे हैं, लेकिन बदले में उन्हें न्याय नहीं मिल रहा।
पंचायत में किसानों का अल्टीमेटम, रखीं ये मांगें
एक दिन पहले हुई पंचायत में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट रुख अपनाया। उनका कहना है कि इनर रिंग रोड और अन्य परियोजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा अब तक पूरा नहीं दिया गया है। किसानों ने मांग की है कि जिस दिन उनकी जमीन ली गई थी, उसी दिन से 15 प्रतिशत ब्याज के साथ पूरा भुगतान किया जाए। इसके अलावा, जिन किसानों के नाम खतौनी से हटाए गए हैं, उन्हें तुरंत सही किया जाए। किसान नेताओं ने कहा कि जब तक प्रशासन उन्हें संतुष्ट नहीं करता और सभी बकाया मुद्दों का समाधान नहीं होता, तब तक किसी भी तरह का कार्यक्रम शांतिपूर्वक नहीं होने दिया जाएगा।
प्रशासन अलर्ट, टकराव की स्थिति पर नजर
किसानों की इस चेतावनी के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति को संभालने के लिए लगातार बातचीत की कोशिश की जा रही है ताकि किसी भी तरह का टकराव टाला जा सके। वहीं, पुलिस और प्रशासनिक टीमें भी कार्यक्रम स्थल के आसपास तैनात की जा रही हैं। यह मामला अब सिर्फ एक परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि किसानों के अधिकार और सरकारी वादों के बीच टकराव का रूप ले चुका है। सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या सरकार और किसान किसी सहमति पर पहुंच पाएंगे या फिर यह विवाद और गहराएगा।
