कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार तड़के एक बड़े और हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन के तहत राज्य सरकार के आवास एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बी. ज़मीर अहमद खान के पर्सनल सेक्रेटरी सरदार सफराज खान के ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई अवैध संपत्ति के मामले में चल रही जांच के तहत की गई। जानकारी के अनुसार, सफराज खान स्थायी रूप से सहकारी समितियों के ऑडिट विभाग में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें मंत्री का निजी सचिव नियुक्त किया गया है।
लोकायुक्त की टीम ने बागलकोट स्थित केस के आधार पर कार्रवाई शुरू की और इसके तहत बेंगलुरु, कोडागु और मैसूरु के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई सुबह जल्दी शुरू की गई थी और इसमें SOG टीम के साथ अन्य जांच अधिकारी भी शामिल थे। टीम ने ताबड़तोड़ तलाशी के दौरान संबंधित संपत्तियों और दस्तावेजों को जब्त किया।
बरामद संपत्ति और धन का आंकलन
लोकायुक्त अधिकारियों ने बताया कि इस छापेमारी में कुल ₹14.38 करोड़ मूल्य की संदिग्ध संपत्तियों का पता चला। इनमें शामिल हैं:
₹8.44 करोड़ मूल्य की अचल संपत्तियां: 4 रिहायशी मकान और 37 एकड़ कृषि भूमि, लगभग ₹3 करोड़ की सोने की ज्वैलरी और आभूषण, ₹66,500 नकद. ₹1.64 करोड़ की लग्जरी गाड़ियां, ₹1.29 करोड़ बैंक डिपॉजिट और अन्य निवेश
अधिकारियों का कहना है कि बरामद दस्तावेज और कारोबारी रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है ताकि अवैध संपत्ति के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके। सूत्रों के अनुसार, तलाशी अभियान के दौरान दो कॉफी एस्टेट्स (कोडागु) और एक रिज़ॉर्ट (एचडी कोटे, मैसूरु) पर भी छापे मारे गए। इस छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने कई दस्तावेज जब्त किए, जो सरदार सफराज खान और उनके सहयोगियों के व्यापारिक नेटवर्क, जमीन और संपत्ति के लेनदेन से संबंधित हैं। अब इन दस्तावेजों का विश्लेषण करके यह पता लगाया जाएगा कि संपत्ति का वास्तविक स्रोत क्या है और क्या इसमें किसी सरकारी निधि या पद का दुरुपयोग हुआ है।
अन्य ठिकानों पर कार्रवाई
लोकायुक्त की टीम ने बताया कि इस कार्रवाई में कुल 13 ठिकानों पर तलाशी ली गई, जिनमें बेंगलुरु के हलासुरु स्थित आवास, कोडागु और मैसूरु में स्थित प्रॉपर्टी शामिल हैं। अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई बेहद संगठित और रणनीतिक तरीके से की गई ताकि कोई भी संदिग्ध संपत्ति बच न सके।
जांच के दौरान यह भी पता चला कि सरदार सफराज खान की संपत्ति केवल निजी आवास तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके निवेश में कई बहु-राज्यीय व्यापारिक इकाइयाँ और रियल एस्टेट संपत्तियां भी शामिल हैं। अधिकारी अब इन सभी प्रॉपर्टी दस्तावेजों और बैंक स्टेटमेंट्स का विश्लेषण कर रहे हैं ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि संपत्ति का स्रोत वैध है या अवैध।
लोकायुक्त पुलिस के DIG ने बताया कि आगे भी जांच के कई चरण रहेंगे, जिनमें संभावित सहयोगियों और संपत्ति से जुड़े अन्य लोगों की भी पड़ताल की जाएगी। यह कार्रवाई कर्नाटक सरकार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कदम के रूप में देखी जा रही है।
राजनीतिक और कानूनी प्रभाव
इस कार्रवाई का राजनीतिक और कानूनी प्रभाव दोनों ही देखने को मिल रहा है। विपक्ष ने इस मामले को लेकर सवाल उठाए हैं और सरकार से जवाब मांगा है कि क्या मंत्री के पास इतनी संपत्ति वैध रूप से हो सकती है। वहीं, लोकायुक्त का कहना है कि जांच निष्पक्ष और कानूनी ढंग से की जा रही है और किसी भी पक्ष को विशेष सुविधा नहीं दी जा रही है।
इस तरह की तलाशी और जब्ती से न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ संदेश जाता है, बल्कि अन्य अधिकारियों और सार्वजनिक पद पर कार्यरत लोगों के लिए भी चेतावनी का काम करता है। अभी जांच चल रही है और यह मामला कई महीनों तक सुर्खियों में रहने वाला है। जांच की पूरी रिपोर्ट के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरी जांच से स्पष्ट होता है कि लोकायुक्त कर्नाटक में भ्रष्टाचार और अवैध संपत्ति के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई कर रहा है और किसी भी स्तर पर अघोषित धन और संपत्ति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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