तेलंगाना में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने बुधवार को हनुमाकोंडा के डिप्टी कलेक्टर वेंकट रेड्डी के घर और उनके रिश्तेदारों से जुड़े ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह छापा पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से किया गया, जिसमें ACB की कई स्पेशल टीमों ने अलग-अलग जगहों पर एक साथ तलाशी शुरू की। इस कार्रवाई का मुख्य मकसद डिप्टी कलेक्टर के पास मौजूद कथित बेहिसाब संपत्ति का पता लगाना था। छापे के दौरान अधिकारियों को बड़ी मात्रा में नकदी और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, तलाशी में करीब 30 लाख रुपये नकद और कुछ अन्य कीमती सामान भी जब्त किया गया। जैसे-जैसे तलाशी आगे बढ़ी, यह मामला केवल रिश्वत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें बड़ी संपत्ति का एंगल भी स्पष्ट नजर आने लगा। ACB के मुताबिक, यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी और मिले हुए सुरागों के आधार पर नए ठिकानों की भी जांच की जा सकती है।
1 लाख की रिश्वत का मामला… 6 दिसंबर को पकड़ में आए थे अधिकारी
इस पूरे मामले की शुरुआत उस वक्त हुई थी जब डिप्टी कलेक्टर वेंकट रेड्डी को 6 दिसंबर को ACB ने रिश्वत मांगने के आरोप में पकड़ा था। रिपोर्ट के अनुसार, वे उस समय इन-चार्ज डिस्ट्रिक्ट एजुकेशन ऑफिसर (DEO) के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे थे। आरोप है कि उन्होंने एक स्कूल को अनुमति देने के बदले 1 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की थी। इसी शिकायत के बाद ACB ने ट्रैप कार्रवाई कर उन्हें रंगे हाथ पकड़ने का दावा किया था। इसके बाद राज्य सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया था। अब इस केस में रिश्वत मांगने की घटना को सिर्फ एक शुरुआती कड़ी माना जा रहा है, क्योंकि जांच आगे बढ़ने पर अधिकारियों को शक हुआ कि अधिकारी के पास उनकी आय से कहीं ज्यादा संपत्ति है। इसी वजह से ACB ने मामले की परतें खोलने के लिए बड़े स्तर पर छापेमारी का फैसला किया। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के मामलों में अक्सर रिश्वत की रकम छोटी दिखती है, लेकिन पीछे संपत्तियों का नेटवर्क काफी बड़ा होता है, जिसकी जांच अब तेज गति से की जा रही है।
हैदराबाद से लेकर कई शहरों तक रेड… आठ स्पेशल टीमों ने खंगाले ठिकाने
जांच को आगे बढ़ाते हुए ACB ने बुधवार को सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि राज्य भर में आठ जगहों पर एक साथ छापा मारा। बताया जा रहा है कि हैदराबाद की रॉक टाउन कॉलोनी समेत कई स्थानों पर एक ही समय में तलाशी शुरू की गई, ताकि कोई भी साक्ष्य छिपाया न जा सके। इस कार्रवाई में ACB ने आठ स्पेशल टीमों को अलग-अलग ठिकानों पर भेजा था। तलाशी के दौरान नकदी के अलावा कुछ ऐसी चीजें भी सामने आईं, जो अधिकारी की आर्थिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। जांच एजेंसी को संदेह है कि अधिकारी ने लंबे समय से अवैध तरीके से संपत्ति जुटाई है और इसे अलग-अलग जगहों पर निवेश के रूप में छिपाया गया। ACB के सूत्रों के मुताबिक, छापेमारी में मिले दस्तावेजों और संपत्ति के रिकॉर्ड को भी जब्त कर लिया गया है, ताकि उनकी जांच करके यह पता लगाया जा सके कि पैसा कहां से आया और किस तरह इन संपत्तियों को खरीदा गया। अधिकारियों का कहना है कि यह जांच सिर्फ घरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बैंक लेन-देन, जमीन के पेपर और दूसरे वित्तीय रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे।
8.30 करोड़ की अवैध संपत्ति का दावा… विला, फार्महाउस और घर तक जांच के घेरे में
ACB के मुताबिक, शुरुआती जांच में अब तक लगभग 8 करोड़ 30 लाख रुपये की कथित अवैध संपत्ति की पहचान हो चुकी है। इसमें नकदी और ज्वेलरी के साथ-साथ कई प्रॉपर्टी भी शामिल हैं। आरोप है कि मंचिरेवुला इलाके में लगभग 6 करोड़ रुपये कीमत का एक विला सामने आया है, जो जांच के दायरे में है। इसके अलावा भोंगिर में एक फार्महाउस और सरूरनगर में एक घर भी शामिल बताया जा रहा है। जांच एजेंसी का यह भी दावा है कि वेंकट रेड्डी के पास 2008 से अवैध संपत्ति होने की आशंका है, यानी यह मामला काफी पुराना और लंबी अवधि से जुड़ा हो सकता है। इतना ही नहीं, उन पर 2016 और 2017 में नेशनल हाईवे स्कीम से जुड़े कथित घोटाले का आरोप भी लगाया गया है, जिसमें किसानों के लिए तय मुआवजे के गलत इस्तेमाल की बात कही जा रही है। ACB अब इन सभी आरोपों और संपत्तियों की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर अधिकारी ने इतने बड़े स्तर पर संपत्ति कैसे बनाई। फिलहाल एजेंसी का कहना है कि जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
