Wednesday, February 4, 2026
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रूस से तेल पर लगेगा ब्रेक? अमेरिका से बढ़ेगी खरीद! मोदी–ट्रंप बातचीत के बाद व्हाइट हाउस ने क्या किया बड़ा दावा

भारत और अमेरिका की ट्रेड डील के बाद व्हाइट हाउस का बड़ा बयान, रूस से तेल खरीद बंद करेगा भारत, अमेरिका से बढ़ेगी सप्लाई, निवेश और किसानों पर क्या असर पड़ेगा

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India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुई नई ट्रेड डील के बाद व्हाइट हाउस की ओर से बड़ा दावा सामने आया है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा है कि भारत ने रूस से तेल आयात बंद करने और अमेरिका से तेल की खरीद बढ़ाने का फैसला किया है। उन्होंने यह बात व्हाइट हाउस के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान कही। लीविट के मुताबिक, यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद लिया गया। उन्होंने बताया कि भारत अब अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिका पर ज्यादा भरोसा करेगा। इसके अलावा, भारत वेनेजुएला से भी तेल खरीद सकता है, जिसका व्यापार फिलहाल अमेरिका की निगरानी में है। व्हाइट हाउस का कहना है कि इससे अमेरिका के उद्योगों और वहां के कामगारों को सीधा फायदा मिलेगा। इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या भारत सच में रूस से तेल खरीद पूरी तरह बंद करने जा रहा है।

मोदी–ट्रंप की बातचीत और 500 अरब डॉलर का निवेश प्लान

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने बताया कि यह समझौता राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच हुई एक अहम फोन कॉल के बाद संभव हुआ। इस बातचीत में सिर्फ तेल आयात ही नहीं, बल्कि निवेश और व्यापार से जुड़े कई मुद्दों पर सहमति बनी। लीविट ने दावा किया कि भारत अमेरिका में करीब 500 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बना रहा है। यह निवेश परिवहन, ऊर्जा और कृषि जैसे अहम क्षेत्रों में किया जाएगा। व्हाइट हाउस ने इसे अमेरिका की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी सफलता बताया है। उनका कहना है कि इस निवेश से अमेरिका में नई नौकरियां पैदा होंगी और इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती मिलेगी। अमेरिका इस डील को सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक समझौता मान रहा है, जिससे दोनों देशों के रिश्ते और मजबूत होंगे। हालांकि, इस निवेश को लेकर भारत की ओर से अभी कोई आधिकारिक आंकड़ा साझा नहीं किया गया है।

ट्रंप की भूमिका पर जोर

कैरोलिन लीविट नेदिए एक इंटरव्यू में भी इन दावों को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस समझौते को कराने में राष्ट्रपति ट्रंप की व्यक्तिगत भूमिका बेहद अहम रही। लीविट के मुताबिक, इस डील में ऊर्जा आयात, व्यापार पहुंच और निवेश से जुड़ी कई अहम बातें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत का रूस से तेल आयात कम करना अमेरिका की उस नीति के अनुरूप है, जिसके तहत वह अपने सहयोगी देशों को रूस पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित कर रहा है। अमेरिका लंबे समय से चाहता है कि बड़े देश रूसी ऊर्जा पर निर्भर न रहें। ऐसे में भारत का यह कदम अमेरिका के लिए बहुत अहम माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि अगर भारत वाकई रूस से तेल खरीद कम करता है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।

भारत की प्राथमिकता: किसानों और घरेलू हितों की सुरक्षा

जहां व्हाइट हाउस इस ट्रेड डील को बड़ी उपलब्धि बता रहा है, वहीं भारत की ओर से संतुलित बयान सामने आया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने साफ कहा है कि इस समझौते में भारत के संवेदनशील क्षेत्रों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने बताया कि कृषि और दुग्ध उत्पादन जैसे सेक्टर, जो सीधे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े हैं, उन्हें किसी भी तरह का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बातचीत के दौरान किसानों और ग्रामीण श्रमिकों के हितों को सबसे ऊपर रखा। उनका कहना है कि भारत किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते में अपने घरेलू हितों से समझौता नहीं करेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ट्रेड डील भारत के लिए ऊर्जा के नए रास्ते खोल सकती है, लेकिन साथ ही सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश के किसानों और आम लोगों पर इसका नकारात्मक असर न पड़े। यही वजह है कि India-US Trade Deal को भारत में सावधानी और संतुलन के साथ देखा जा रहा है।

 

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