पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात के बीच प्रधानमंत्री पीएम मोदी ने रविवार रात सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCS) की अहम बैठक की अध्यक्षता की। यह बैठक उस समय बुलाई गई जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर बड़े हमले की खबरें सामने आईं और ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei के मारे जाने की पुष्टि हुई। सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और भारत के रणनीतिक हितों को ध्यान में रखते हुए मौजूदा हालात की विस्तृत समीक्षा की। पीएम मोदी अपने दो दिवसीय दौरे से दिल्ली लौटते ही सीधे इस बैठक में शामिल हुए, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
कौन-कौन रहे मौजूद, क्या मुद्दे उठे
पीएम मोदी की इस हाई लेवल बैठक में रक्षा मंत्री Rajnath Singh, गृह मंत्री Amit Shah, विदेश मंत्री S. Jaishankar और वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman समेत कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार Ajit Doval, प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल Anil Chauhan और अन्य शीर्ष अधिकारी भी बैठक में शामिल हुए। बैठक में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, संभावित सैन्य विस्तार और उसके भारत पर पड़ने वाले असर पर चर्चा की गई। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर ध्यान दिया गया, क्योंकि यह भारत के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति का अहम मार्ग है। अगर इस मार्ग पर कोई बाधा आती है, तो तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता
सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी की बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम एशिया में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर हुई। ईरान में करीब 10 हजार और इजरायल में 40 हजार से ज्यादा भारतीय रहते हैं। वहीं खाड़ी देशों में लगभग 90 लाख भारतीय काम करते हैं। मौजूदा तनाव के कारण कई देशों का हवाई क्षेत्र प्रभावित हुआ है और उड़ानें बाधित हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सैकड़ों भारतीय दुबई और अन्य हवाई अड्डों पर फंसे हुए हैं और सोशल मीडिया के जरिए मदद की अपील कर रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि क्षेत्र में मौजूद भारतीय दूतावास लगातार अपने नागरिकों के संपर्क में हैं और हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। जरूरत पड़ने पर निकासी अभियान चलाने की भी तैयारी रखी गई है।
वैश्विक असर और भारत की रणनीति
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने बयान दिया है कि ईरान पर सटीक हमले जारी रहेंगे, जबकि ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। ऐसे में पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ने का खतरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव और बढ़ा तो इसका असर वैश्विक बाजारों, तेल की कीमतों और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। भारत ने अतीत में भी संकट के समय अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने में सफलता हासिल की है, और इस बार भी सरकार पूरी तरह सतर्क है। फिलहाल हालात पर करीबी नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर त्वरित फैसले लेने की तैयारी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पश्चिम एशिया का यह संकट किस दिशा में जाता है और भारत अपनी रणनीति कैसे तय करता है।
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