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लूला डी सिल्वा से गले मिले PM मोदी,मेलोनी से की हंसी मजाक,G-20 में दिखा मोदी का जलवा, सामने आया वीडियो

G-20 Summit 2025 में PM मोदी ने जोहांसबर्ग में कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। भारत की कूटनीति क्यों बनी सबसे बड़ा आकर्षण?

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जोहांसबर्ग में इस बार का G-20 शिखर सम्मेलन उस वक्त अचानक सुर्खियों में आ गया, जब PM मोदी सम्मेलन स्थल पर पहुँचे। माहौल पहले से ज्यादा जीवंत लग रहा था। दरवाज़े पर दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने हाथ जोड़कर उनका स्वागत किया और कुछ ही सेकंडों बाद दृश्य और दिलचस्प हो गया। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी मुस्कुराते हुए सामने आईं और दोनों नेताओं के बीच हल्की-फुल्की बातचीत का एक अनौपचारिक सा पल कैमरों में कैद हो गया। इसी दौरान ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा ने PM मोदी को देखते ही उन्हें गले लगा लिया। इस गर्मजोशी भरे पल ने समिट का माहौल ही बदल दिया और दुनिया भर के कूटनीतिक विश्लेषक यह समझने की कोशिश करने लगे कि आखिर इस मंच पर भारत क्या संकेत दे रहा है। क्या यह सिर्फ औपचारिक मुलाकातें हैं, या फिर कोई बड़ा संदेश आने वाला है?

मेलोनी और मोदी की सहज बातचीत में छिपी कूटनीति

इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी और PM मोदी की मुलाकात को इस साल के समिट का सबसे हल्का लेकिन प्रभावशाली पल कहा जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच बातचीत का अंदाज़ बेहद सहज रहा, लेकिन चर्चाओं की दिशा बिल्कुल गंभीर ,ऊर्जा साझेदारी से लेकर डिजिटल सहयोग, रक्षा से लेकर व्यापार विस्तार तक कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विचार हुआ। वैश्विक तनावों और बदलते समीकरणों के बीच भारत और इटली के रिश्तों में बढ़ती निकटता अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का ध्यान लगातार खींच रही है।

इस बातचीत की एक खास बात यह भी रही कि दोनों नेताओं के बीच पिछले साल से लगातार संवाद बढ़ा है। G7 Summit में भी दोनों की मुलाकात सुर्खियां बनी थी। इसके अलावा मेलोनी द्वारा भारत में होने वाले AI Impact Summit 2026 के लिए खुले समर्थन ने यह संकेत दे दिया कि आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच टेक्नोलॉजी और रणनीतिक साझेदारी और गहरी हो सकती है।

लूला का आलिंगन

ब्राजील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा के साथ PM मोदी की मुलाकात भावनात्मक कही जा रही है। जैसे ही लूला ने मोदी को देखा, उन्होंने आगे बढ़कर गर्मजोशी से गले लगा लिया। यह सिर्फ औपचारिक स्वागत नहीं था दोस्ताना रिश्ते और आपसी भरोसे का संकेत था। इसके बाद यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मिलने के दौरान भी यही सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिली।

मगर इस बार का सम्मेलन एक और वजह से खास हो गया अमेरिका, रूस और चीन जैसे बड़े देशों के शीर्ष नेता इसमें मौजूद नहीं हैं। ऐसे हालात में भारत की उपस्थिति और PM मोदी की सक्रियता और अधिक प्रमुख होकर सामने आई है।

भारत के लिए यह सम्मेलन इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि 2023 में भारत ने ही अफ्रीकी यूनियन को G-20 की सदस्यता दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी, और अब पहली बार यह समिट अफ्रीका की धरती पर आयोजित हो रहा है। ऐसे में PM मोदी की हर मुलाकात और हर बयान को दुनिया एक बड़े बदलाव की दिशा में देख रही है। कूटनीति के इस मंच पर भारत किस नई भूमिका में उभरने वाला है, इस पर सबकी निगाहें टिक गई हैं।

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