जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हाल ही में हुए आतंकी हमले में जान गंवाने वाले शुभम् द्विवेदी का परिवार आज गहरे सदमे में है। अपने इकलौते बेटे को खो चुके माता-पिता और उसकी पत्नी, जो अब विधवा हो चुकी हैं, अपने दुःख को लेकर वृंदावन पहुंचे। वहां उन्होंने प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज की शरण ली। जब माता-पिता ने महाराज के चरणों में बैठकर अपनी व्यथा साझा की, तो वहां मौजूद साधकों की आंखें भी नम हो गईं।
संत प्रेमानंद बोले: “शरीर जाता है, आत्मा नहीं…”
संत प्रेमानंद महाराज ने पूरे धैर्य और करुणा के साथ शोक संतप्त परिवार की बात सुनी। उन्होंने कहा, “जो शरीर गया, वह नश्वर था… आत्मा अमर है। शुभम् अब भी तुम्हारे पास है, बस अलग रूप में।” संत ने बताया कि देश के लिए दिया गया बलिदान व्यर्थ नहीं जाता, बल्कि वह आत्मा को और ऊंचा बना देता है। शुभम् के पिता ने कहा, “हमारा बेटा वापस नहीं आएगा, लेकिन हम अब उसकी याद में खुद को समाज सेवा में लगाएंगे।
मौन पत्नी ने तोड़ी चुप्पी, कहा – “अब उसकी स्मृति ही मेरा जीवन है”
शुभम् की पत्नी, जो अब तक गहरे दुख में मौन थीं, संत के शब्दों से भावनात्मक रूप से प्रभावित होकर पहली बार कुछ बोलीं। उन्होंने धीमे स्वर में कहा, “शायद यही उसका मार्ग था… अब मेरा धर्म है, उसकी स्मृति को जीवित रखना।” संत प्रेमानंद महाराज ने उन्हें साधना और सेवा का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी, जिससे वे अपने दुख को एक सकारात्मक दिशा दे सकें। वृंदावन की इस मुलाकात ने एक टूटे हुए परिवार को फिर से खड़ा होने की उम्मीद दी है।
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