असम की राजनीति में हलचल मचा देने वाले मामले में गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अहम निर्णय सुनाया है। अखिल भारतीय यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के विधायक अमीनुल इस्लाम पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) को कोर्ट ने रद्द कर दिया है। इस्लाम को 24 अप्रैल को उस बयान के आधार पर गिरफ्तार किया गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि पहलगाम में 22 अप्रैल को हुआ आतंकी हमला केंद्र सरकार की “साज़िश” का हिस्सा है। इस बयान को कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बताते हुए प्रशासन ने कड़े कदम उठाते हुए NSA लगाया था।
कोर्ट ने विस्तृत सुनवाई के बाद कहा कि इस मामले में NSA लगाने के लिए आवश्यक आधार और औचित्य पर्याप्त रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया। इसलिए हिरासत आदेश को तुरंत प्रभाव से खत्म किया जाता है।
छह महीने से अधिक समय तक हिरासत में रहे विधायक
गिरफ्तारी के बाद अमीनुल इस्लाम को लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। NSA एक ऐसा कानून है जिसके तहत किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा चले लंबे समय तक जेल में रखा जा सकता है। इसी कानून का उपयोग करते हुए प्रशासन ने इस्लाम को महीनों तक हिरासत में रखा।
करीब छह महीने से अधिक समय तक जेल में रहे इस्लाम और उनके समर्थक लगातार यह दावा करते रहे कि उनके बयान को “गलत समझा गया” और इसमें किसी भी तरह की राष्ट्र-विरोधी भावना नहीं थी। उनका कहना था कि उन्होंने केवल व्यक्तिगत राजनीतिक राय व्यक्त की थी। इस बीच उनकी गिरफ्तारी को लेकर राज्य की राजनीति भी काफी गर्म रही। विपक्षी दलों ने भी इस पर सवाल उठाए और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया।
हाईकोर्ट ने क्यों कहा कि NSA लगाना उचित नहीं था
हाईकोर्ट के इस फैसले ने कई महत्वपूर्ण कानूनी पहलुओं पर रोशनी डाली। न्यायालय ने कहा कि किसी भी व्यक्ति पर NSA लगाने के लिए प्रशासन को ठोस, गहरे और विश्वसनीय प्रमाण पेश करने होते हैं, जिनसे स्पष्ट हो कि आरोपी की गतिविधियाँ राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
कोर्ट ने पाया कि अमीनुल इस्लाम के बयान को लेकर प्रशासन ने जिस स्तर पर NSA लगाया, वह कानून के निर्धारित मापदंडों को पूरा नहीं करता। सिर्फ एक राजनीतिक बयान या आलोचना के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम जैसे कठोर कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में गिरफ्तारी और उसके बाद हुई कार्रवाई “अपर्याप्त तथ्यों” पर आधारित थी।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि यदि इस्लाम किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।
राजनीतिक माहौल में फैसले का असर
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद असम के राजनीतिक माहौल में नई चर्चा शुरू हो गई है। एआईयूडीएफ ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह न्याय की जीत है और यह साबित करता है कि प्रशासन ने “अनुचित और जल्दबाजी में” कार्रवाई की थी।
वहीं राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी माहौल में ऐसे बयान और उन पर की गई कानूनी कार्रवाई दोनों ही बड़े राजनीतिक मुद्दे बन जाते हैं। अमीनुल इस्लाम की रिहाई के बाद राज्य की राजनीति में नई हलचल मचने की संभावना है और विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ बड़ा मुद्दा बनाकर पेश कर सकता है।
फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि इस फैसले के बाद प्रशासन की ओर से क्या अगला कदम उठाया जाता है और क्या इस मामले को लेकर आगे कोई पुनर्विचार याचिका दायर की जाएगी। लेकिन इतना तय है कि गुवाहाटी हाईकोर्ट का यह आदेश राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर लंबी चर्चा का विषय बना रहेगा।
