Saturday, February 21, 2026
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क्या 1 अप्रैल से टोल प्लाजा पर कैश पूरी तरह बंद? NHAI के नए फैसले से बदल जाएगी सफर की तस्वीर!

1 अप्रैल से देशभर के टोल प्लाजा पर नकद भुगतान बंद करने की तैयारी। NHAI के नए प्रस्ताव के तहत अब फास्टैग और UPI से ही होगा टोल भुगतान।

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देश में हाईवे पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए 1 अप्रैल से बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने राष्ट्रीय राजमार्गों के टोल प्लाजा पर नकद भुगतान की व्यवस्था समाप्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रस्ताव के अनुसार अब टोल शुल्क का भुगतान पूरी तरह डिजिटल माध्यम से किया जाएगा और कैश लेने की व्यवस्था बंद कर दी जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि वाहन चालकों को अब फास्टैग या यूपीआई के जरिए ही टोल चुकाना होगा। अगर यह प्रस्ताव तय समय पर लागू होता है तो देशभर के करीब 1150 टोल प्लाजा पर नकद लेनदेन इतिहास बन जाएगा।

एनएचएआई का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन प्रणाली को और प्रभावी बनाने, ट्रैफिक जाम कम करने और टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारों को खत्म करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में फास्टैग प्रणाली ने टोल भुगतान की प्रक्रिया को काफी हद तक आसान बनाया है। आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में 98 प्रतिशत से अधिक टोल लेनदेन फास्टैग के माध्यम से हो रहे हैं, जिससे स्पष्ट है कि देश तेजी से डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में अब पूरी तरह कैशलेस व्यवस्था लागू करना एनएचएआई के लिए अगला स्वाभाविक कदम माना जा रहा है।

फास्टैग और UPI से होगा भुगतान: क्या है नई व्यवस्था

नई व्यवस्था के तहत टोल प्लाजा पर भुगतान केवल दो डिजिटल माध्यमों से किया जा सकेगा—फास्टैग और यूपीआई। फास्टैग रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID) आधारित तकनीक पर काम करता है, जिसमें वाहन के विंडस्क्रीन पर लगे टैग से टोल शुल्क अपने आप कट जाता है। इससे वाहन को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ती और कुछ ही सेकंड में बैरियर खुल जाता है। इससे न केवल समय की बचत होती है, बल्कि ईंधन की भी बचत होती है और प्रदूषण में कमी आती है।

इसके अलावा जिन वाहनों में फास्टैग नहीं है, उनके लिए यूपीआई आधारित भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। टोल प्लाजा पर क्यूआर कोड स्कैन कर वाहन चालक तुरंत अपने मोबाइल से भुगतान कर सकते हैं। इससे डिजिटल भुगतान का दायरा और व्यापक हो जाएगा। एनएचएआई का मानना है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम से पारदर्शिता बढ़ेगी, नकद लेनदेन में होने वाली गड़बड़ियों पर रोक लगेगी और राजस्व संग्रह अधिक सटीक होगा। यह कदम सरकार की डिजिटल इंडिया पहल को भी मजबूती देता है और देश में डिजिटल लेनदेन की संस्कृति को आगे बढ़ाता है।

नकद भुगतान पर दोगुना चार्ज: क्यों बढ़ाया गया दबाव

फिलहाल राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियमों के तहत बिना सक्रिय फास्टैग के नकद भुगतान करने वाले वाहनों से दोगुना यूजर शुल्क वसूला जाता है। यानी यदि किसी वाहन का सामान्य टोल शुल्क 100 रुपये है, तो कैश में भुगतान करने पर 200 रुपये तक देना पड़ सकता है। इस नियम का उद्देश्य पहले से ही लोगों को डिजिटल माध्यम अपनाने के लिए प्रेरित करना था।

वहीं यूपीआई के जरिए भुगतान करने पर वास्तविक शुल्क का लगभग 1.25 गुना चार्ज लिया जाता है। इसका कारण यह है कि फास्टैग को प्राथमिक और सबसे तेज विकल्प के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। अब जब नकद भुगतान पूरी तरह बंद करने की तैयारी है, तो यह स्पष्ट संकेत है कि एनएचएआई पूरी तरह डिजिटल टोल प्रणाली लागू करना चाहता है। अधिकारियों का मानना है कि इससे टोल प्लाजा पर होने वाले विवाद भी कम होंगे और राजस्व की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकेगी।

हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि ग्रामीण इलाकों या कम डिजिटल जागरूकता वाले क्षेत्रों में यह बदलाव शुरुआती दिनों में चुनौतियां पैदा कर सकता है। ऐसे में एनएचएआई को जागरूकता अभियान और तकनीकी सहायता पर भी ध्यान देना होगा, ताकि किसी भी वाहन चालक को परेशानी का सामना न करना पड़े।

यात्रियों को क्या होगा फायदा: समय, पारदर्शिता और सुविधा

पूरी तरह डिजिटल टोल व्यवस्था लागू होने के बाद यात्रियों को कई तरह के फायदे मिलने की उम्मीद है। सबसे बड़ा लाभ समय की बचत का होगा। टोल प्लाजा पर लंबी कतारें अक्सर यात्रा का अनुभव खराब कर देती हैं, खासकर त्योहारों और छुट्टियों के दौरान। फास्टैग और यूपीआई आधारित भुगतान से वाहनों की आवाजाही तेज होगी और ट्रैफिक जाम की समस्या में कमी आएगी।

इसके साथ ही पारदर्शिता भी बढ़ेगी। डिजिटल भुगतान से हर लेनदेन का रिकॉर्ड स्वतः दर्ज होगा, जिससे भ्रष्टाचार या गड़बड़ी की संभावना कम होगी। सरकार को भी सटीक आंकड़े मिलेंगे, जिससे हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में बेहतर योजना बनाई जा सकेगी। पर्यावरण के लिहाज से भी यह कदम महत्वपूर्ण है, क्योंकि बिना रुके वाहन गुजरने से ईंधन की खपत घटेगी और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में स्मार्ट और ऑटोमेटेड ट्रांसपोर्ट सिस्टम की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकता है। अगर 1 अप्रैल से यह नियम पूरी तरह लागू होता है, तो देश के हाईवे पर सफर का अनुभव पहले से कहीं ज्यादा तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगा। अब देखना यह है कि वाहन चालक इस बदलाव को कितनी जल्दी अपनाते हैं और डिजिटल टोल प्रणाली को कितना सफल बनाते हैं।

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