मध्य प्रदेश की सियासत में सोमवार का दिन किसी बड़े सियासी ड्रामे से कम नहीं रहा। ग्वालियर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने विजयपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों को पूरी तरह से पलटते हुए एक ऐसा फैसला सुनाया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। अदालत ने कांग्रेस के निर्वाचित विधायक मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन को ‘शून्य’ घोषित कर दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कोर्ट ने केवल मल्होत्रा को अयोग्य ही नहीं ठहराया, बल्कि उनके प्रतिद्वंदी और भाजपा के कद्दावर नेता रामनिवास रावत को विजयपुर का नया विधायक घोषित कर दिया है। यह फैसला उन उम्मीदवारों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो चुनाव के दौरान अपनी जानकारी छिपाते हैं।
क्यों गिरी मुकेश मल्होत्रा पर गाज? छिपाया था आपराधिक रिकॉर्ड
कानूनी गलियारों में इस चर्चा ने जोर पकड़ लिया है कि आखिर मुकेश मल्होत्रा से कहाँ चूक हुई। दरअसल, जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया की बेंच ने पाया कि मल्होत्रा ने 2024 के उपचुनाव के दौरान नामांकन दाखिल करते समय अपने हलफनामे (Affidavit) में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज कुछ लंबित आपराधिक मामलों का जिक्र चुनाव आयोग को दिए गए दस्तावेजों में नहीं किया था। सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मतदाता को अपने उम्मीदवार के बारे में सब कुछ जानने का अधिकार है। जानकारी छिपाना ‘भ्रष्ट आचरण’ (Corrupt Practice) की श्रेणी में आता है, जिसके आधार पर उनका चुनाव रद्द कर दिया गया।
रामनिवास रावत की ‘लॉटरी’: बिना चुनाव जीते फिर पहुंचे विधानसभा
इस फैसले के सबसे बड़े लाभार्थी रामनिवास रावत रहे हैं। रावत, जो कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता हुआ करते थे, भाजपा में शामिल होने के बाद विजयपुर उपचुनाव हार गए थे। उस समय मुकेश मल्होत्रा ने उन्हें करीब 7,000 से अधिक वोटों से मात दी थी। हालांकि, रावत ने हार नहीं मानी और मल्होत्रा के निर्वाचन को कोर्ट में चुनौती दी थी। अब हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक आदेश देते हुए कहा है कि चूंकि जीतने वाले उम्मीदवार का नामांकन ही अवैध था, इसलिए दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार यानी रामनिवास रावत को विजेता माना जाए। इस फैसले के बाद विजयपुर की जनता को फिर से वोट डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी और रावत सीधे तौर पर विधायक की शपथ ले सकेंगे।
क्या है आगे का रास्ता? कानूनी और सियासी दांव-पेच जारी
कोर्ट के इस आदेश ने कांग्रेस खेमे में मायूसी और भाजपा में उत्साह भर दिया है। हालांकि, यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। कानूनी जानकारों का मानना है कि मुकेश मल्होत्रा इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट इस फैसले पर ‘स्टे’ लगा देता है, तो रामनिवास रावत की विधायकी पर फिर से संशय के बादल मंडरा सकते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो विजयपुर का यह मामला आने वाले अन्य चुनावों के लिए एक मिसाल बनेगा, जहाँ अब उम्मीदवारों को अपने हलफनामे भरते समय सौ बार सोचना होगा। मध्य प्रदेश विधानसभा के भीतर अब संख्या बल का समीकरण भी इस एक सीट की वजह से बदलता नजर आएगा।
Read more-तेल की कीमतों में बड़ा उछाल! क्या महंगा होगा पेट्रोल-डीजल? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिया जवाब
