नेपाल की राजधानी काठमांडू इन दिनों भयानक हिंसा की चपेट में है। GenZ के गुस्से ने संसद से लेकर मंत्रियों के घरों तक आग लगा दी है। प्रधानमंत्री और कई मंत्री देश छोड़कर भाग चुके हैं, जबकि प्रदर्शनकारियों की मांग है कि काठमांडू के मेयर को देश की कमान सौंपी जाए। इस अफरातफरी के बीच पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा कि जब जनता की आवाज दबाई जाती है, तब हालात श्रीलंका, बांग्लादेश और अब नेपाल जैसे बनते हैं।
हजरतबल की घटना पर भी बोलीं महबूबा
महबूबा मुफ्ती ने डोडा के विधायक मेहराज मलिक की पीएसए के तहत गिरफ्तारी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि को इस तरह हिरासत में लेना गलत है, भले ही उन्होंने सरकारी अधिकारियों के खिलाफ तीखी भाषा का इस्तेमाल किया हो। मुफ्ती का आरोप है कि हजरतबल की घटना से ध्यान हटाने के लिए यह कार्रवाई की गई है, जबकि वहां की घटना में करीब 50 लोग जांच के घेरे में हैं। उनका कहना है कि जब-जब जनता की बात नहीं सुनी जाती, तब ऐसे हालात पैदा होते हैं जो सरकारों के लिए संभालना मुश्किल हो जाता है।
मुफ्ती ने चेतावनी दी कि श्रीलंका और बांग्लादेश में पहले जो हुआ, और अब नेपाल में जो हो रहा है, वह किसी भी देश के लिए सबक है। अगर लोकतांत्रिक आवाज को दबाया जाएगा, तो नतीजे डरावने ही निकलेंगे। उन्होंने सरकारों को नसीहत दी कि जनता के मुद्दों को दबाने की बजाय समाधान की दिशा में काम करें, वरना परिणाम सभी को भुगतने पड़ेंगे।
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