गुजरात के भावनगर में रविवार को एक अस्पताल कॉम्प्लेक्स में अचानक भीषण आग लग गई, जिसके चलते पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस इमारत में कई छोटे-बड़े अस्पताल और क्लीनिक मौजूद हैं, जिनमें सबसे ज्यादा खतरा पहली मंजिल पर स्थित बच्चों के अस्पताल के लिए था। आग लगते ही धुआं तेजी से पूरे फ्लोर में फैलने लगा और अस्पताल में भर्ती नवजात शिशुओं से लेकर 8–10 साल तक के बच्चों की जान पर बन आई।
घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिनमें इमारत से धुआं उठता दिखाई दे रहा है और लोग घबराए हुए बाहर भाग रहे हैं। आग लगने का कारण फिलहाल स्पष्ट नहीं है, लेकिन प्राथमिक जांच में इलेक्ट्रिकल फॉल्ट की आशंका जताई जा रही है। घटना के समय अस्पताल स्टाफ ने तुरंत अलार्म बजाया और मरीजों को हटाने की कोशिश की, लेकिन आग की तीव्रता इतनी तेज थी कि कुछ ही मिनटों में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
नवजातों को बचाने में जुटे स्थानीय लोग
फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोगों ने बिना समय गंवाए बच्चों को बचाने की कोशिश शुरू कर दी। जैसे ही लोगों को पता लगा कि इमारत में नवजात और छोटे बच्चे फंसे हैं, तो वे मौके पर दौड़ पड़े। किसी ने पानी लाया, किसी ने चादरें पकड़ीं, तो कुछ लोग खिड़कियाँ तोड़ने लगे। गवाहों के अनुसार, लगभग चार से पांच युवा बिना डरे बच्चों वाले वार्ड में घुस गए। उन्होंने खिड़कियां तोड़कर रास्ता बनाया और एक-एक कर बच्चों को बाहर लाना शुरू किया। कई नवजातों को धुएं से बचाने के लिए तौलियों, चादरों और कपड़ों में लपेटा गया। बाहर इंतज़ार कर रहे माता-पिता रोते हुए अपने बच्चों को गोद में लेते दिखे।
यह दृश्य किसी फिल्म जैसा था—लेकिन असल ज़िंदगी के इन नायकों ने अपनी सूझबूझ और साहस से कई छोटी जानें बचा लीं।
घंटों की मेहनत के बाद आग पर पाया काबू
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियाँ मौके पर पहुंचीं। धुआं इतना घना था कि दमकलकर्मियों को अंदर जाने में मुश्किल हो रही थी। इसके बावजूद टीम ने कुछ ही देर में राहत कार्य शुरू किया और आग को फैलने से रोका। अस्पताल के अन्य हिस्सों को सुरक्षित करने के लिए तुरंत इमारत खाली कराई गई।
दमकल अधिकारियों ने बताया कि आग पर काबू पाने में लगभग दो घंटे लगे। राहत की बात यह रही कि स्थानीय लोगों और अग्निशमन दल की त्वरित कार्रवाई की वजह से कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई। कई बच्चों को मामूली धुएं की समस्या के बाद दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सभी की हालत स्थिर बताई जा रही है। अधिकारी अब आग के कारणों की जांच कर रहे हैं और कॉम्प्लेक्स के सुरक्षा इंतज़ामों का भी मूल्यांकन किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ, जांच के आदेश
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर स्थानीय लोगों की बहादुरी की खूब सराहना की जा रही है। कई यूज़र्स ने कहा कि अगर लोग तुरंत आगे नहीं आते, तो स्थिति कहीं अधिक भयावह हो सकती थी। वीडियो में दिख रहा है कि कैसे लोग जान जोखिम में डालकर खिड़कियों पर चढ़े, शीशे तोड़े और धुएं से भरे वार्ड में घुसकर मासूमों को बाहर निकाला। स्थानीय प्रशासन ने भी लोगों के साहस की प्रशंसा की और तत्काल जांच के आदेश दे दिए। अधिकारियों का कहना है कि अस्पताल में आग बुझाने के उपकरण मौजूद थे, लेकिन इतनी बड़ी आग को रोकने के लिए वे पर्याप्त नहीं थे। इस घटना ने एक बार फिर अस्पतालों में फायर सेफ्टी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल बच्चे सुरक्षित हैं और उनका उपचार जारी है। लेकिन यह हादसा उन सभी के लिए चेतावनी है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा में कोई लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
