गुजरात के गिर सोमनाथ जिले के उना क्षेत्र में स्थित गांगड़ा गांव में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को चौंका दिया। आमतौर पर तेंदुए जैसे हिंसक जंगली जानवर का नाम सुनते ही लोगों के होश उड़ जाते हैं, लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग रही। गांव के एक बुजुर्ग किसान ने अपने बेटे की जान बचाने के लिए ऐसा साहस दिखाया कि खूंखार तेंदुआ भी हार मान गया। यह घटना उस समय हुई जब गांव में रोज़ की तरह शांति थी और लोग अपने घरों में थे। रात करीब 10 बजे वाड़ी क्षेत्र की ओर से अचानक एक तेंदुआ गांव की सीमा में घुस आया और सीधे एक घर के ओसरी में बैठे बुजुर्ग पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से पूरे परिवार में अफरा-तफरी मच गई और गांव में दहशत का माहौल बन गया।
चीख सुन दौड़ा बेटा, तेंदुए ने बदला निशाना
हमले के समय बुजुर्ग किसान ओसरी में बैठे थे, तभी तेंदुए ने उन पर झपट्टा मार दिया। अचानक हुए इस हमले से बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए और दर्द से चीख उठे। पिता की चीख-पुकार सुनकर उनका बेटा सादुरभाई तुरंत दौड़कर मौके पर पहुंचा। बेटे को देखकर तेंदुए ने बुजुर्ग को छोड़ दिया और उस पर टूट पड़ा। यह पल पिता के लिए सबसे खौफनाक था, क्योंकि उनके सामने बेटे की जान खतरे में थी। गांव के लोग जब तक कुछ समझ पाते, तब तक पिता और पुत्र दोनों तेंदुए से जूझ रहे थे। तेंदुआ बेहद आक्रामक था और बार-बार हमला कर रहा था, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई।
आत्मरक्षा में बुजुर्ग पिता की अद्भुत बहादुरी
इस जानलेवा हालात में बुजुर्ग किसान बाबूभाई वाजा ने हिम्मत नहीं हारी। बेटे को बचाने के लिए उन्होंने पास में मौजूद भाला और दातरड़े को उठाया और पूरी ताकत से तेंदुए पर वार किया। उम्र और घायल होने के बावजूद बाबूभाई ने वह साहस दिखाया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। पिता और पुत्र दोनों ने आत्मरक्षा में तेंदुए से मुकाबला किया। कुछ ही देर में यह संघर्ष खूनखराबे में बदल गया और आखिरकार घटनास्थल पर ही तेंदुए की मौत हो गई। हालांकि इस संघर्ष में बाबूभाई और उनके बेटे सादुरभाई दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें पहले उना के सरकारी अस्पताल ले जाया गया और बाद में बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां दोनों का उपचार जारी है।
वन विभाग की कार्रवाई और इलाके में चर्चा
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। टीम ने तेंदुए के शव को अपने कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए जसाधार एनिमल केयर सेंटर भेज दिया। साथ ही घटना में प्रयुक्त हथियारों को भी जब्त किया गया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उना क्षेत्र में आत्मरक्षा के दौरान तेंदुए की मौत का यह पहला मामला बताया जा रहा है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में बाबूभाई वाजा की बहादुरी की चर्चा हो रही है। गांव के लोग उन्हें एक ऐसे पिता के रूप में देख रहे हैं, जिसने अपने बेटे की जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की। वहीं, इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में जंगली जानवरों की बढ़ती गतिविधियों और मानव-वन्यजीव संघर्ष पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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