जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। घाटी में लंबे समय से सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद के सैफुल्लाह ग्रुप को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। रविवार को हुई मुठभेड़ में मारे गए तीनों आतंकियों की पहचान भी कर ली गई है। इनकी पहचान सैफुल्लाह, फरमान अली और बाशा उर्फ हुरैरा के रूप में हुई है। तीनों पर पिछले वर्ष किश्तवाड़ पुलिस ने पांच-पांच लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह ग्रुप घाटी में कई बड़ी साजिशों में शामिल रहा था और लगातार अपनी गतिविधियां बढ़ा रहा था। पिछले 30 दिनों में सुरक्षाबलों ने खुफिया इनपुट के आधार पर इस नेटवर्क से जुड़े आठ आतंकियों को अलग-अलग अभियानों में मार गिराया। ताजा मुठभेड़ के बाद सैफुल्लाह ग्रुप का पूरी तरह सफाया हो गया है, जिसे सुरक्षा एजेंसियां एक बड़ी रणनीतिक सफलता मान रही हैं।
‘ऑपरेशन त्राशी-1’ कैसे बना निर्णायक वार
22 फरवरी को किश्तवाड़ जिले में शुरू किया गया ‘ऑपरेशन त्राशी-1’ इस पूरे अभियान का अहम हिस्सा साबित हुआ। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने संयुक्त रूप से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। सुरक्षाबलों को खुफिया एजेंसियों से सूचना मिली थी कि 2 से 3 आतंकी चतरू के जंगलों और आसपास के रिहायशी इलाकों में छिपे हुए हैं। सूचना मिलते ही इलाके की घेराबंदी कर दी गई। सभी एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स सील कर दिए गए ताकि कोई भी आतंकी भाग न सके। मुठभेड़ के दौरान तीनों आतंकियों को मार गिराया गया। मौके से AK-47 राइफलें, गोला-बारूद और अन्य हथियार बरामद किए गए। एक आतंकी का शव झुलसा हुआ मिला, जिसकी बाद में पहचान की पुष्टि की गई। इस ऑपरेशन को कई दिनों की सटीक निगरानी और रणनीतिक तैयारी के बाद अंजाम दिया गया था।
व्हाइट नाइट कोर की जानकारी और हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल
ऑपरेशन के दौरान सेना की व्हाइट नाइट कोर ने सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान की जानकारी साझा की थी। पोस्ट में बताया गया कि ऑपरेशन त्राशी-1 के तहत काउंटर इंटेलिजेंस फोर्स (CIF) डेल्टा, पुलिस और सीआरपीएफ की टीमों ने तीसरे आतंकी का शव और हथियार बरामद कर लिए हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने इस अभियान में आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग किया। एडवांस ड्रोन की मदद से जंगलों और पहाड़ी इलाकों की निगरानी की गई। स्निफर डॉग्स को भी सर्च ऑपरेशन में लगाया गया ताकि छिपे हुए आतंकियों का सटीक पता लगाया जा सके। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियां तैनात की गईं। ऑपरेशन के दौरान नागरिकों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया। पूरे क्षेत्र में सर्च अभियान कई चरणों में चलाया गया, ताकि किसी भी संभावित खतरे को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
घाटी में आतंकी नेटवर्क पर बड़ा प्रहार
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सैफुल्लाह ग्रुप के खत्म होने से घाटी में जैश-ए-मोहम्मद के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। सैफुल्लाह को इलाके का मोस्ट वांटेड आतंकी माना जाता था और उसकी तलाश लंबे समय से की जा रही थी। खुफिया इनपुट के आधार पर लगातार निगरानी रखी जा रही थी, जिसके बाद यह निर्णायक कार्रवाई संभव हो पाई। पिछले एक महीने में आठ आतंकियों के मारे जाने और अब तीन शीर्ष आतंकियों के ढेर होने से संगठन की स्थानीय संरचना कमजोर पड़ गई है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियां अभी भी सतर्क हैं और संभावित मॉड्यूल्स पर नजर बनाए हुए हैं। घाटी में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए आगे भी सर्च ऑपरेशन जारी रहने की संभावना है। सुरक्षाबलों की इस सफलता को आतंकवाद के खिलाफ चल रही मुहिम में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
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