पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर को जेल के भीतर जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक और कानूनी हलकों में हलचल मच गई है। बताया जा रहा है कि अमिताभ ठाकुर के बैरक के बाहर कंप्यूटर से टाइप किया गया एक कागज का टुकड़ा मिला, जिस पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते हुए साफ तौर पर “जान से मार देंगे” लिखा था। इस घटना की जानकारी खुद अमिताभ ठाकुर ने जेल प्रशासन को दी, जिसके बाद सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर के अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी का कहना है कि यह महज डराने की कोशिश नहीं बल्कि एक गंभीर धमकी है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। जेल के भीतर इस तरह का पर्चा मिलना कई आशंकाओं को जन्म देता है और यह सवाल भी उठाता है कि आखिर जेल के अंदर ऐसी धमकी कैसे पहुंची। जेल अधीक्षक प्रेम सागर शुक्ल ने पर्चा मिलने की पुष्टि करते हुए कहा है कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और दोषियों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
कोर्ट में पेशी की मांग, जमानत सुनवाई से जुड़ा अहम मोड़
धमकी के इस मामले के बीच पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने जनपद न्यायाधीश धनेंद्र प्रताप सिंह की अदालत में एक आवेदन पत्र दाखिल किया है। उन्होंने शनिवार को होने वाली जमानत सुनवाई के दौरान स्वयं अदालत में उपस्थित कराए जाने की मांग की है। अमिताभ ठाकुर का कहना है कि वह खुद अदालत में रहकर अपनी बात रखना चाहते हैं, ताकि कोई भी महत्वपूर्ण तथ्य छूट न जाए। जनपद न्यायाधीश ने उनके इस आवेदन को नियमित जमानत प्रार्थना पत्र के साथ प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। इससे साफ है कि शनिवार की सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। इस दौरान न केवल अमिताभ ठाकुर की नियमित जमानत बल्कि उनकी पत्नी नूतन ठाकुर की अग्रिम जमानत पर भी अदालत विचार करेगी। कानूनी जानकारों के मुताबिक, आरोपी की व्यक्तिगत उपस्थिति से कोर्ट के सामने पूरे मामले की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकती है, खासकर तब जब सुरक्षा से जुड़ी गंभीर बातें सामने आ रही हों।
10 दिसंबर से जेल में बंद, जमानत में लगातार आ रही अड़चनें
गौरतलब है कि औद्योगिक प्लॉट आवंटन से जुड़े एक मामले में पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर 10 दिसंबर 2025 से जेल में निरुद्ध हैं। उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान लगातार किसी न किसी कारण से अड़चनें आती रही हैं। शुक्रवार को भी उनके अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर बहस के दौरान अमिताभ ठाकुर को जेल से तलब किए जाने की मांग की थी। हालांकि अदालत ने उस आवेदन को भी जमानत प्रार्थना पत्र के साथ शनिवार को पेश करने का आदेश दिया। इस पूरे घटनाक्रम ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ जमानत पर फैसला लंबित है, वहीं दूसरी ओर जेल के भीतर जान को खतरा होने की बात सामने आ रही है। समर्थकों का कहना है कि यदि किसी आरोपी को जेल में रहते हुए धमकी मिलती है तो यह उसके मौलिक अधिकारों और सुरक्षा व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े करता है।
धमकी के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल, जांच में जुटा प्रशासन
पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर को बैरक के बाहर मिले धमकी भरे पर्चे के बाद जेल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा शुरू कर दी है। जेल अधीक्षक के अनुसार यह पता लगाया जा रहा है कि पर्चा किसने और किस उद्देश्य से छोड़ा। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि क्या यह किसी बाहरी साजिश का हिस्सा है या जेल के अंदर से ही किसी ने यह हरकत की। अमिताभ ठाकुर के वकील का आरोप है कि जेल के भीतर उनके मुवक्किल की जान को वास्तविक खतरा है और प्रशासन को तुरंत कड़े कदम उठाने चाहिए। इस मामले ने एक बार फिर जेलों की सुरक्षा व्यवस्था और बंदियों की सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। शनिवार को होने वाली जमानत सुनवाई और धमकी की जांच—दोनों पर अब सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि इनसे यह तय होगा कि आगे इस हाई-प्रोफाइल मामले में क्या मोड़ आता है।
Read More-यूपी में घर-घर पहुंचेगी सरकारी टीम! योगी सरकार शुरू करने जा रही 100 दिन का ये बड़ा अभियान
