ईरान-इजरायल के बढ़ते टकराव के बीच ओमान की खाड़ी से दुखद खबर आई है। राजधानी मस्कट के तट से दूर एक तेल टैंकर पर हमले में भारतीय नाविक की मौत हो गई। ओमान की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक जहाज की पहचान MKD VYOM के रूप में हुई है और मृतक चालक दल का सदस्य भारत का नागरिक था। रिपोर्टों में बताया गया कि टैंकर पर बम से लैस ड्रोन बोट से हमला किया गया, जिससे जहाज को नुकसान पहुंचा और एक क्रू मेंबर की जान चली गई। घटना के बाद समुद्री सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी गई है।
पहले दिन ही होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने का ऐलान
ईरान-इजरायल तनाव की शुरुआत में ही ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of Hormuz को बंद करने का ऐलान किया था। यह जलमार्ग दुनिया के तेल कारोबार के लिए जीवनरेखा माना जाता है। इसके बाद से कई देशों के जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। माना जा रहा है कि फारस की खाड़ी के संकरे मुहाने के पास आने वाले जहाजों को चेतावनी दी जा रही है और कुछ पर हमले भी हुए हैं। विश्लेषकों का कहना है कि इस रास्ते में रुकावट से वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर सीधा असर पड़ सकता है। समुद्री बीमा कंपनियों ने भी खतरे का स्तर बढ़ा दिया है।
‘स्काईलाइट’ टैंकर पर भी हुआ था हमला
इस घटना से एक दिन पहले भी ओमान के मैरीटाइम सिक्योरिटी सेंटर (MSC) ने एक और हमले की पुष्टि की थी। रविवार को ‘स्काईलाइट’ नाम के तेल टैंकर को मुसैंडम प्रायद्वीप से करीब पांच समुद्री मील दूर निशाना बनाया गया। उस जहाज पर कुल 20 लोग सवार थे, जिनमें 15 भारतीय और 5 ईरानी नागरिक शामिल थे। हमले के समय जहाज पलाऊ का झंडा लगाए हुए था। हालांकि उस घटना में सभी क्रू सुरक्षित बताए गए, लेकिन लगातार हो रहे हमलों ने समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है।
क्षेत्रीय जंग का असर, भारत की चिंता बढ़ी
मध्य पूर्व में जारी टकराव के बीच समुद्र में काम कर रहे हजारों भारतीय नाविकों की सुरक्षा बड़ा सवाल बन गई है। भारत सरकार हालात पर नजर बनाए हुए है और ओमान तथा अन्य देशों के संपर्क में है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ तो समुद्री मार्गों पर जोखिम और बढ़ सकता है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण खाड़ी क्षेत्र अस्थिर बना हुआ है। ऐसे में जहाजरानी कंपनियां वैकल्पिक मार्गों और अतिरिक्त सुरक्षा उपायों पर विचार कर रही हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कूटनीतिक बातचीत से हालात सुधरेंगे या समुद्र में हमलों का सिलसिला जारी रहेगा।
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