गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। शुक्रवार शाम सीएम योगी गोरखनाथ ओवरब्रिज के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। जैसे ही मुख्यमंत्री का काफिला कार्यक्रम स्थल पर रुका, पहले गोरखपुर के सांसद रवि किशन गाड़ी से उतरे और उसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बाहर आए। उसी समय एक गाय अचानक दौड़ती हुई वीवीआईपी सुरक्षा घेरे के भीतर पहुंच गई और मुख्यमंत्री की ओर बढ़ने लगी। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए चौंकाने वाला था और कुछ पलों के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।
जवानों की सतर्कता से टला बड़ा हादसा
गाय को मुख्यमंत्री की ओर बढ़ते देख सुरक्षा में तैनात लगभग 15 जवान तुरंत अलर्ट हो गए। जवानों ने बिना देरी किए गाय को चारों ओर से घेर लिया और उसे मुख्यमंत्री से दूर करते हुए दूसरी दिशा में भगा दिया। हालांकि इस दौरान कोई अप्रिय घटना नहीं हुई, लेकिन सवाल यह उठने लगा कि कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और VVIP मूवमेंट के बावजूद एक आवारा पशु कार्यक्रम स्थल तक कैसे पहुंच गया। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह घटना गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर की लापरवाही को बेहद संवेदनशील माना जाता है।
जांच में नगर निगम सुपरवाइजर की लापरवाही उजागर
घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल शुरुआती जांच शुरू की। जांच में गोरखनाथ क्षेत्र के नगर निगम सुपरवाइजर अरविंद कुमार की लापरवाही सामने आई है। उन पर पूरे इलाके में नगर निगम से जुड़े कार्यों की निगरानी और साफ-सफाई के साथ-साथ आवारा पशुओं की रोकथाम की जिम्मेदारी थी। प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर अरविंद कुमार को सस्पेंड कर दिया गया है। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के निर्देश पर इंटरनल जांच भी शुरू कर दी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सुरक्षा घेरा होने के बावजूद गाय VVIP क्षेत्र में कैसे प्रवेश कर गई और इसमें और कौन-कौन जिम्मेदार हो सकता है।
17 दिन में तीसरी बार सुरक्षा में चूक से बढ़ी चिंता
यह घटना इसलिए भी ज्यादा गंभीर मानी जा रही है क्योंकि पिछले 17 दिनों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सुरक्षा में लापरवाही का यह तीसरा मामला बताया जा रहा है। नियमों के अनुसार, किसी भी VVIP मूवमेंट से पहले पूरे रास्ते, कार्यक्रम स्थल और आसपास के इलाके की सघन जांच की जाती है। इसके बावजूद बार-बार ऐसी घटनाएं सामने आना प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय बन गया है। अब इस मामले में प्रशासन की नजर इस बात पर है कि भविष्य में ऐसी चूक दोबारा न हो और मुख्यमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए।
