प्रेमानंद जी महाराज आज के दौर में उन संतों में गिने जाते हैं जिनकी एक झलक पाने के लिए लोग सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करते हैं। वृंदावन के राधा केली कुंज आश्रम में रोज सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं।
माना जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से महाराज जी के दर्शन करता है, उसकी मनोकामनाएं जरूर पूरी होती हैं। लेकिन कई भक्त इस बात से अंजान रहते हैं कि महाराज जी से मिलने के लिए भी एक तय प्रक्रिया होती है, जिसे जानना जरूरी है।
कैसे होता है दर्शन का क्रम?
प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम में आमतौर पर हर सुबह और शाम सत्संग का आयोजन होता है। सुबह के समय ही भक्तों को दर्शन का अवसर मिलता है।
महाराज जी के दर्शन दो तरह से होते हैं –
1. सामान्य दर्शन, जिसमें भक्त केवल आशीर्वाद लेते हैं।
2. व्यक्तिगत मिलन, जिसमें चयनित भक्तों को कुछ समय के लिए महाराज जी से व्यक्तिगत बातचीत का अवसर मिलता है।
सामान्य दर्शन के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता। हालांकि आश्रम की व्यवस्था बनाए रखने के लिए टोकन सिस्टम लागू है। टोकन सीमित संख्या में जारी किए जाते हैं, इसलिए जो भक्त जल्दी पहुंचते हैं, उन्हें प्राथमिकता मिलती है।
टोकन बुकिंग की असली प्रक्रिया
महाराज जी से मिलने के लिए कोई ऑनलाइन सिस्टम नहीं है। इसके लिए आपको वृंदावन स्थित राधा केली कुंज आश्रम में स्वयं पहुंचना होता है।
सुबह लगभग 9 बजे से दर्शन या अगले दिन के मिलन हेतु नाम दर्ज किए जाते हैं।
प्रत्येक व्यक्ति को अपना नाम और स्थान बताकर टोकन प्राप्त करना होता है। यह टोकन ही आपकी एंट्री का पास होता है।
टोकन नि:शुल्क दिया जाता है, लेकिन भक्तों को अनुशासन और मर्यादा का पालन करना होता है।
कितने बजे करें दर्शन?
महाराज जी का आश्रम सुबह बहुत जल्दी खुल जाता है।
प्रातः सत्संग: लगभग 4 बजे से शुरू होता है।
मंगल आरती: 5 बजे से 6 बजे तक।
भक्त दर्शन: सुबह 7 से 9 बजे तक।
इस समय महाराज जी भक्तों से मिलते हैं, आशीर्वाद देते हैं और कभी-कभी संक्षिप्त संवाद भी करते हैं।
शाम को आरती के बाद भी सीमित समय के लिए दर्शन कराए जाते हैं, लेकिन व्यक्तिगत मिलन आम तौर पर सुबह ही संभव होता है।
नियम और मर्यादा जिनका पालन जरूरी
प्रेमानंद जी महाराज के आश्रम में शांति और सादगी को सर्वोपरि माना जाता है।
भक्तों को मोबाइल फोन बंद रखने, फोटोग्राफी न करने और सादे वस्त्र पहनने की सलाह दी जाती है।
यहां किसी तरह की भीड़भाड़ या हड़बड़ी को पसंद नहीं किया जाता।
जो भक्त सेवा भावना से आते हैं, उन्हें आश्रम में रहकर भक्ति कार्य करने का अवसर भी मिलता है।
व्यक्तिगत मिलन के लिए विशेष अनुशासन और धैर्य जरूरी है — यह किसी “बुकिंग” की तरह नहीं, बल्कि “योग्यता और भावना” पर निर्भर करता है।
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