Shankaracharya Controversy News: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को हाई कोर्ट से गिरफ्तारी पर एक महीने की राहत मिलने के बाद विवाद और गहराता जा रहा है। इस मामले में केस दर्ज करवाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी ने अदालत के आदेश पर गहरी निराशा जताई है। उनका कहना है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद आरोपी को राहत मिलना पीड़ित पक्ष के लिए बेहद डराने वाला है। आशुतोष का दावा है कि अदालत में उनकी बात तक नहीं सुनी गई और पूरे मामले में एकतरफा आदेश पारित कर दिया गया।
उनके अनुसार, उन्हें रात करीब 10:30 बजे सुनवाई की सूचना दी गई, ऐसे में तत्काल कोर्ट पहुंचना संभव नहीं था। अगले ही दिन से उन्हें और उनके साथ मौजूद बटुकों को जान का खतरा महसूस होने लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो उन्हें पुलिस सुरक्षा दी गई और न ही उनकी अपील दाखिल करने में किसी तरह की मदद मिली। इसी वजह से वे खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रहे हैं।
पीड़ित का भावुक बयान
आशुतोष ब्रह्मचारी ने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद छोटे-छोटे बटुक मानसिक रूप से डरे हुए हैं। उनका कहना है कि जिन बच्चों की चीखें सुनी जानी चाहिए थीं, उनकी आवाज को नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि आदेश आने के बाद शंकराचार्य के समर्थक ढोल बजाकर जश्न मना रहे हैं, गुलाल उड़ा रहे हैं और पीड़ित पक्ष को धमकियां दिलवा रहे हैं।
आशुतोष का दावा है कि उनके बटुकों को उठाने की कोशिश तक की गई, उनकी गाड़ी पर हमला हुआ और सोशल मीडिया पर फर्जी सूचियां जारी कर माहौल को और डरावना बनाया गया। उनका कहना है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद पुलिस ने अब तक न तो घटनास्थल का नक्शा तैयार किया और न ही किसी तरह की ठोस कार्रवाई की। इस स्थिति में वे खुद को और बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए छिप-छिपकर घूमने को मजबूर हैं।
ताकत, पैसा और सियासत का आरोप
आशुतोष ब्रह्मचारी का कहना है कि वे एक बेहद ताकतवर व्यक्ति के खिलाफ खड़े हैं, जिसके पास पैसा, बड़े वकील और राजनीतिक समर्थन मौजूद है। उनका आरोप है कि इसी ताकत के बल पर उन्हें और उनके साथियों को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा, “हम इतने बड़े आदमी से नहीं लड़ सकते। वो हमें मरवा देगा, इसलिए हम हाथ जोड़कर गुहार लगा रहे हैं।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि कानून के तहत उनकी जिम्मेदारी केवल सूचना देने की थी, इसके बाद जांच और कार्रवाई पुलिस और न्यायालय को करनी चाहिए थी। लेकिन उनका आरोप है कि पुलिस ने न तो निष्पक्षता दिखाई और न ही उन्हें सुरक्षा दी। इसके उलट, शंकराचार्य की ओर से कथित तौर पर झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसमें एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इससे उनका डर और भी बढ़ गया है।
‘पुलिस भी हमारी नहीं सुन रही’
आशुतोष ब्रह्मचारी ने पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि वे लगातार थाने और अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायतों पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हो रही। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सुरक्षा देने के बजाय नजरअंदाज किया जा रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने कई नेताओं पर भी धमकियां दिलवाने का आरोप लगाया। आशुतोष का कहना है कि सुबह से शाम तक फोन कॉल्स आ रही हैं, गालियां दी जा रही हैं और खुलेआम कहा जा रहा है कि उन्हें “उठा लो”। इस डर के माहौल में उन्होंने देवी शाकुंभरी के सामने यह निर्णय लिया है कि वे जितना लड़ सकते थे, उतना लड़ चुके हैं। अब वे खुद और बटुकों की जान बचाने को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित हैं। उनका सवाल है कि जब पुलिस और सिस्टम साथ नहीं दे रहा, तो उन्हें आखिर न्याय कैसे मिलेगा?
