शिमला स्थित इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (IGMC) से रेजिडेंट डॉक्टर राघव नरूला की बर्खास्तगी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। एक कथित वायरल वीडियो के आधार पर कॉलेज प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई ने न सिर्फ मेडिकल जगत में बल्कि राजनीतिक हलकों में भी बहस छेड़ दी है। डॉक्टर की बर्खास्तगी को लेकर कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं कि क्या बिना पूरी जांच के इतना बड़ा फैसला लेना उचित था। इस मामले में अब पूर्व केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर खुलकर डॉक्टर के समर्थन में सामने आ गए हैं, जिससे यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ गया है।
अनुराग ठाकुर का सवाल: क्या वीडियो ही सबूत है?
मीडिया से बातचीत के दौरान अनुराग सिंह ठाकुर ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले निष्पक्ष और पूरी जांच होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि केवल एक छोटे से वायरल वीडियो के आधार पर यह तय करना कि कौन सही है और कौन गलत, न्यायसंगत नहीं है। अनुराग ठाकुर ने यह भी कहा कि वीडियो का पूरा संदर्भ, परिस्थितियां और पृष्ठभूमि जाने बिना फैसला लेना जल्दबाजी होगी। उनका मानना है कि अगर प्रशासन ने बिना जांच के कार्रवाई की है, तो यह एक खतरनाक मिसाल बन सकती है, क्योंकि कल को किसी भी व्यक्ति के खिलाफ वीडियो वायरल कर उसे दोषी ठहराया जा सकता है।
अनुराग ठाकुर ने की जांच की मांग
अनुराग ठाकुर ने इस पूरे मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही यह तय होना चाहिए कि डॉक्टर की गलती थी या नहीं। उनका यह भी कहना है कि मेडिकल संस्थानों में काम करने वाले डॉक्टर पहले ही भारी दबाव में रहते हैं और ऐसे में बिना जांच के सख्त कार्रवाई करना उनके मनोबल को तोड़ सकता है। इस बयान के बाद IGMC प्रशासन पर भी दबाव बढ़ता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या वायरल वीडियो को ही अंतिम सत्य मान लिया गया, या फिर किसी अन्य तथ्यों की भी पड़ताल की गई।
BJP कार्यक्रम के दौरान अनुराग ठाकुर ने दिया बयान
शुक्रवार को अनुराग सिंह ठाकुर नादौन में आयोजित भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए थे। इस दौरान भाजपा और भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में मौजूद कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए भी उन्होंने यह मुद्दा उठाया और कहा कि न्याय के लिए सही प्रक्रिया का पालन जरूरी है। उनके इस बयान के बाद साफ है कि IGMC डॉक्टर की बर्खास्तगी का मामला अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन चुका है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।
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