गणतंत्र दिवस 2026 की भव्य परेड के दौरान एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा को तेज कर दिया। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ लंबे समय बाद किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नजर आए। कर्तव्य पथ पर आयोजित इस राष्ट्रीय समारोह में उनकी उपस्थिति उस समय और भी खास हो गई, जब वे केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की आगे वाली पंक्ति में बैठे दिखे। जैसे ही कैमरे उनकी ओर मुड़े, सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक सवाल उठने लगे कि क्या यह केवल औपचारिक उपस्थिति है या इसके पीछे कोई बड़ा संकेत छिपा है। बीते कई महीनों से सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए रखने वाले धनखड़ का इस तरह सामने आना स्वाभाविक रूप से लोगों के लिए चौंकाने वाला रहा। परेड में सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और आधुनिक भारत की झलक के बीच धनखड़ की मौजूदगी एक अलग ही चर्चा का केंद्र बन गई।
इस्तीफे के बाद क्यों बन गई थी दूरी
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद वे लगभग पूरी तरह से सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर हो गए थे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनके स्वास्थ्य को लेकर लगातार चिकित्सकीय जांच चल रही थी, जिस वजह से डॉक्टरों ने उन्हें आराम की सलाह दी थी। इसी दौरान वे किसी भी बड़े राजनीतिक या सामाजिक आयोजन में नजर नहीं आए। उनके अचानक इस्तीफे ने उस समय विपक्ष को सरकार पर सवाल उठाने का मौका दे दिया था। कई राजनीतिक दलों ने इसे लेकर पारदर्शिता की मांग भी की थी। ऐसे माहौल में गणतंत्र दिवस जैसे बड़े राष्ट्रीय आयोजन में उनकी उपस्थिति को सामान्य नहीं माना जा रहा है। जानकारों का मानना है कि धनखड़ का इस मंच पर आना यह दिखाता है कि उनकी सेहत में अब पहले से सुधार है, लेकिन साथ ही यह भी संकेत देता है कि वे पूरी तरह से सार्वजनिक जीवन से अलग नहीं हुए हैं।
बार-बार बिगड़ती सेहत और AIIMS में भर्ती
जगदीप धनखड़ की सेहत को लेकर चिंताएं उस समय और बढ़ गई थीं, जब 10 जनवरी को वे अपने आवास के बाथरूम में बेहोश होकर गिर पड़े थे। बताया गया कि वे एक ही सुबह दो बार बेहोश हुए, जिसके बाद उन्हें तुरंत एम्स में भर्ती कराया गया। वहां डॉक्टरों ने उनका एमआरआई सहित कई जरूरी परीक्षण किए। अधिकारी सूत्रों के अनुसार, 74 वर्षीय धनखड़ पहले भी कई मौकों पर सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान असहज महसूस कर चुके हैं। कच्छ का रण, उत्तराखंड, केरल और दिल्ली जैसे स्थानों पर आयोजनों के दौरान भी उनके बेहोश होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। यही कारण था कि उनके इस्तीफे को केवल औपचारिक निर्णय नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य मजबूरी के रूप में देखा गया। पिछले वर्ष भी हृदय संबंधी समस्या के चलते उन्हें एम्स में भर्ती कराना पड़ा था। इन तमाम घटनाओं ने उनकी सेहत को लेकर लोगों की चिंता बढ़ा दी थी।
परेड में मौजूदगी के मायने क्या हैं
गणतंत्र दिवस 2026 की परेड में जगदीप धनखड़ की मौजूदगी को केवल एक औपचारिक उपस्थिति मानना शायद जल्दबाजी होगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इतने लंबे अंतराल के बाद किसी राष्ट्रीय मंच पर दिखना यह संकेत देता है कि वे अब खुद को पहले से बेहतर महसूस कर रहे हैं। वहीं कुछ लोग इसे सरकार और विपक्ष के बीच चल रही चर्चाओं से भी जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि धनखड़ की ओर से इस उपस्थिति को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन उनका शांत और संयमित अंदाज यह दिखाता है कि वे फिलहाल किसी राजनीतिक विवाद से दूरी बनाए रखना चाहते हैं। परेड के दौरान उनकी मौजूदगी ने यह भी साफ कर दिया कि स्वास्थ्य कारणों से दूरी बनाने के बावजूद उनका सार्वजनिक जीवन से नाता पूरी तरह टूटा नहीं है। आने वाले दिनों में क्या वे और कार्यक्रमों में नजर आएंगे, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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