उमर खालिद सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसा बयान सामने आया, जिसने पूरे कोर्टरूम का माहौल बदल दिया। दिल्ली पुलिस की ओर से दलीलें रखते हुए अधिकारियों ने कहा कि देश में एक नया और खतरनाक चलन तेजी से बढ़ रहा है—डॉक्टर, इंजीनियर और highly qualified लोग अपने पेशे का काम छोड़कर सक्रिय रूप से देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। यह टिप्पणी केवल सामान्य स्तर पर नहीं थी बल्कि सीधे तौर पर उन आरोपों से जुड़ी थी, जिनका सामना इस समय उमर खालिद और शरजील इमाम कर रहे हैं। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि यह मामला सिर्फ एक प्रदर्शन या भाषण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कथित रूप से योजनाबद्ध हिंसा और बड़े नेटवर्क की आशंका भी शामिल है।
पेशेवरों की ‘सक्रिय भूमिका’ पर पुलिस की तर्क
सुनवाई के दूसरे हिस्से में दिल्ली पुलिस ने कहा कि पढ़े-लिखे युवाओं में एक खास वर्ग ऐसा है, जो सोशल मीडिया और वैचारिक समूहों के प्रभाव में आकर अपने करियर से हटकर गतिविधियों में शामिल हो रहा है। पुलिस का दावा था कि यह वर्ग न केवल विरोध प्रदर्शनों में नेतृत्वकारी भूमिका निभाता है बल्कि अपने शिक्षित होने की वजह से समाज पर बड़ा प्रभाव भी डालता है। उन्होंने दलील दी कि उमर खालिद सुनवाई इस बात का एक उदाहरण है कि किस तरह प्रोफेशनल पृष्ठभूमि वाले लोग योजनाबद्ध तरीके से भीड़ को प्रभावित कर सकते हैं और बड़े पैमाने पर अस्थिरता पैदा कर सकते हैं। पुलिस ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त जांच और न्यायिक सतर्कता बेहद जरूरी है।
बचाव पक्ष ने कहा—बयान ‘ओवर जनरलाइज्ड’, केस तथ्यों पर हो
उमर खालिद की ओर से पेश वकीलों ने पुलिस के इस बयान पर कड़ा विरोध जताया और कहा कि देश में लाखों डॉक्टर-इंजीनियर हैं, और कुछ उदाहरणों के आधार पर पूरी प्रोफेशनल कम्युनिटी को ‘देश विरोधी गतिविधियों’ से जोड़ना उचित नहीं है। बचाव पक्ष का कहना था कि उमर खालिद सुनवाई को केवल ठोस साक्ष्यों, कॉल रिकॉर्ड, भाषणों और घटनाओं की टाइमलाइन के आधार पर ही जांचा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस ऐसे बयानों के जरिए न्यायालय का ध्यान असल मुद्दे से हटाने की कोशिश कर रही है, जो कि आरोपित घटनाओं के वास्तविक तथ्य हैं। कोर्ट ने इस पर स्पष्ट किया कि वह किसी भी व्यापक टिप्पणी को स्वीकार नहीं करता और हर केस अपने साक्ष्यों पर ही तय होगा।
कोर्ट ने कहा—आरोप गंभीर, पर निष्पक्षता से होगी सुनवाई
सुनवाई के अंतिम चरण में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की चिंताओं को नोट किया, लेकिन साफ कहा कि किसी भी पेशे या समुदाय को एक बड़े बयान से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उमर खालिद सुनवाई पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और कानूनी दायरे में होगी। अदालत ने कहा कि यदि पुलिस के पास सबूत हैं कि कथित रूप से किसी विशेष समूह ने योजनाबद्ध साजिश बनाई, तो उसे ठोस दस्तावेजों और साक्ष्यों के साथ पेश किया जाएगा। वहीं कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि आने वाली सुनवाइयों में कथित साजिश, कॉल डिटेल्स, बयान और अन्य तकनीकी सबूतों पर विस्तार से चर्चा होगी।
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