Delhi Car Blast Case में जांच तेजी से आगे बढ़ रही है और इसी बीच एक ऐसा सबूत सामने आया है जिसने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है। धमाके से पहले मुख्य आरोपी डॉ. उमर ने खुद का एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। यह वीडियो अब सामने आया है और इसमें उमर न सिर्फ कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा देता दिखाई देता है, बल्कि वह सुसाइड बॉम्बिंग जैसे आतंकवादी तरीकों की पैरवी भी करता नजर आता है।
वीडियो के लहजे से साफ है कि उमर काफी समय से इस मानसिकता में डूबा हुआ था और वह जान-बूझकर अपने आपको ऐसे विचारों के लिए तैयार कर रहा था। जांच एजेंसियां अब इस वीडियो को ‘प्रि-ऑपरेशन स्टेटमेंट’ मानकर इसकी बारीकी से पड़ताल कर रही हैं, क्योंकि इससे उमर की मंशा, तैयारी और नेटवर्क के संकेत मिल सकते हैं।
वीडियो में उमर ने क्या कहा? जांच टीम भी चौंक गई
वीडियो में उमर शांत लेकिन खतरनाक भाषा में अपने विचार रखता है। वह कहता है—
“सबसे बड़ी गलती यह है कि लोग यह समझ ही नहीं पाते कि ऐसी विचारधाराएं वास्तव में क्या होती हैं। यह किसी लोकतांत्रिक या सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकती। इसके खिलाफ तर्क भी मौजूद हैं, विरोधाभास भी, लेकिन लोग समझ नहीं पाते।”
इसके बाद उमर अपनी मानसिक स्थिति का एक झरोखा दिखाते हुए कहता है—
“आत्मघाती हमलों का सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि जब कोई यह मान लेता है कि वह तय समय पर मरने जा रहा है, तब उसकी सोच एक खतरनाक मोड़ ले लेती है। वह मौत को मंज़िल मान बैठता है।”
उमर वीडियो में यह भी कहता है कि ऐसी सोच किसी भी मानवीय या लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है। लेकिन उसके शब्दों और चेहरे के भाव बताते हैं कि वह खुद उसी मानसिकता में गहराई तक जा चुका था। जांच एजेंसियों के अधिकारी मानते हैं कि यह वीडियो उसके कट्टरपंथी बनने की प्रक्रिया और उद्देश्य को साफ तौर पर दर्शाता है। अब टीम यह पता लगाने में जुटी है कि क्या यह वीडियो किसी संगठन की प्रेरणा से बनाया गया था या यह पूरी तरह से उसकी व्यक्तिगत विचारधारा का हिस्सा था।
उमर के परिवार ने क्या बताया? मां का बयान जांच में अहम
पूछताछ में उमर की मां ने कई चौंकाने वाली बातें बताईं। वह बोलीं कि उन्हें लंबे समय से शक था कि उमर गलत रास्ते पर जा रहा है। वह कई-कई दिनों तक घर से दूर रहता था, परिवार से बात नहीं करता था और घरवालों को उसे कॉल न करने की हिदायत दे चुका था। उसके व्यवहार में अचानक आए बदलाव से परिवार को चिंता जरूर हुई, लेकिन उन्होंने कभी पुलिस या स्थानीय प्रशासन से संपर्क नहीं किया।
परिवार के इस बयान ने जांच टीम को यह संकेत दिया है कि उमर का कट्टरपंथी बनना कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि वह धीरे-धीरे इस सोच में फंसता गया। टीम अब यह भी जांच कर रही है कि इस दौरान उसका संपर्क किन लोगों से था और उसे इस दिशा में किसने प्रेरित किया।
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