Ajmer News: राजस्थान के अजमेर जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां जिस बुजुर्ग महिला को उसके किरायेदार ‘माताजी’ कहकर पुकारते थे, वही पैसों के लालच में उसके कातिल निकले। आदर्श नगर थाना क्षेत्र में रहने वाली मोहिनी देवी रावत की संदिग्ध हालात में हुई हत्या की गुत्थी को पुलिस ने महज 24 घंटे में सुलझा लिया है। इस सनसनीखेज खुलासे ने न सिर्फ मृतका के परिवार को झकझोर दिया, बल्कि पूरे इलाके में डर और अविश्वास का माहौल पैदा कर दिया है।
बंद कमरे में मिला शव, पूरे इलाके में फैली सनसनी
घटना अजमेर के आदर्श नगर इलाके की है, जहां बुजुर्ग मोहिनी देवी रावत का शव उनके ही घर के एक कमरे में बंद अवस्था में मिला था। शव मिलने की सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। शुरुआत में मामला पारिवारिक विवाद या किसी करीबी की संलिप्तता का लग रहा था। मृतका के बेटे अजय रावत ने पुलिस को दी शुरुआती शिकायत में अपने ही पिता भागचंद पर संदेह जताया था। इसी आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और परिवार के साथ-साथ आसपास के लोगों से भी पूछताछ की। हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनास्थल की बारीकी से जांच के बाद मामला और ज्यादा पेचीदा होता चला गया। पुलिस को जल्द ही यह एहसास हो गया कि हत्या के पीछे कोई ऐसा शख्स है, जो परिवार का बेहद करीबी है और जिस पर किसी को शक न हो।
‘माताजी’ कहने वाले किरायेदारों पर गया शक
जांच के दौरान पुलिस की नजर मृतका के घर में किराए से रह रहे दो युवकों हेमंत और विकास पर पड़ी। ये दोनों युवक मोहिनी देवी को ‘माताजी’ कहकर बुलाते थे और घर के सदस्य की तरह रहते थे। सीओ नॉर्थ मनीष बड़गुजर के अनुसार, हत्या के बाद दोनों आरोपी पूरे समय मृतका के बेटे अजय के साथ मौजूद रहे। अस्पताल ले जाने से लेकर जेएलएन अस्पताल की मोर्चरी तक, हर जगह उन्होंने खुद को परिवार का हमदर्द दिखाया ताकि किसी को उन पर शक न हो। लेकिन पुलिस को उनकी गतिविधियां असामान्य लगीं। कड़ाई से पूछताछ करने पर दोनों टूट गए और उन्होंने कबूल किया कि पैसों और आभूषणों के लालच में उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस के अनुसार, 19 वर्षीय हेमंत निजी क्षेत्र में नौकरी करता है, जबकि 24 वर्षीय विकास बीएड का छात्र है।
हत्या के बाद रची गई साजिश, आभूषण जमीन में छिपाए
पूछताछ में सामने आया कि हत्या के बाद दोनों आरोपियों ने मृतका के सोने-चांदी के आभूषण घर के आसपास जमीन में गड्ढा खोदकर छिपा दिए। इतना ही नहीं, ताकि शक उन पर न जाए, वे अंतिम संस्कार और शोक सभा में भी शामिल हुए। जांच में यह भी सामने आया है कि हत्या से पहले मृतका के पति भागचंद और दोनों आरोपियों के बीच लगातार मोबाइल पर बातचीत हो रही थी। इसी वजह से पुलिस अब पति की भूमिका की भी गहराई से जांच कर रही है। हालांकि, फिलहाल इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि हत्या की साजिश में पति की सीधी संलिप्तता थी या नहीं। पुलिस ने दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया है और आभूषणों की बरामदगी के प्रयास जारी हैं।
बेटे ने पिता पर लगाया था आरोप, जांच में खुली असली परतें
मृतका के बेटे अजय रावत का कहना है कि मां की हत्या के बाद वह पूरी तरह टूट गया था और हालात को समझ नहीं पा रहा था। शुरुआती सदमे और परिस्थितियों के चलते उसे पिता पर शक हुआ, लेकिन पुलिस जांच में जैसे-जैसे सच्चाई सामने आई, पूरा मामला पलट गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह हत्या भरोसे, लालच और विश्वासघात का खौफनाक उदाहरण है। जिस घर में माताजी कहकर आदर किया जाता था, उसी घर में पैसों के लिए ऐसी साजिश रची गई। पुलिस अब पूरे मामले की कड़ी से कड़ी जोड़ने में जुटी है ताकि किसी भी दोषी को बख्शा न जाए और सच पूरी तरह सामने आ सके।
