चारधाम यात्रा से पहले केदारनाथ धाम को लेकर एक बड़ा और सख्त फैसला लिया जा रहा है। अब मंदिर परिसर में मोबाइल फोन और कैमरे के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगाने की तैयारी है। बद्री-केदार मंदिर समिति और रुद्रप्रयाग जिला प्रशासन मिलकर ऐसी व्यवस्था बना रहे हैं, जिससे श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन मोबाइल-फ्री माहौल में कर सकें। इसका सीधा मतलब है कि अब मंदिर के अंदर न फोटो ली जा सकेगी, न वीडियो बनेगा और न ही सोशल मीडिया के लिए रील शूट करने की इजाजत होगी। नियम तोड़ने वालों पर जुर्माना भी लगाया जाएगा।
रील और वीडियो से बढ़ी परेशानी
हर साल लाखों श्रद्धालु केदारनाथ धाम पहुंचते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां दर्शन से ज्यादा मोबाइल कैमरे नजर आने लगे हैं। मंदिर परिसर के भीतर फोटो खींचने, वीडियो बनाने और रील शूट करने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। इससे न सिर्फ मंदिर की पवित्रता और परंपरा प्रभावित हो रही है, बल्कि दर्शन की लाइन में खड़े दूसरे श्रद्धालुओं को भी परेशानी झेलनी पड़ती है। कई बार भीड़ का प्रवाह रुक जाता है और सुरक्षा व्यवस्था पर भी असर पड़ता है। इन्हीं कारणों को देखते हुए प्रशासन इस बार कोई ढील नहीं देना चाहता।
प्रवेश से पहले जमा करना होगा मोबाइल
पहले भी मंदिर परिसर में मोबाइल इस्तेमाल पर रोक लगाने की कोशिशें की गई थीं, लेकिन वे पूरी तरह सफल नहीं हो पाईं। कई लोग नियमों की अनदेखी कर मोबाइल अंदर ले जाते रहे। इस बार प्रशासन ज्यादा सख्त व्यवस्था की तैयारी कर रहा है। जानकारी के मुताबिक, मंदिर में प्रवेश से पहले श्रद्धालुओं को मोबाइल फोन जमा कराना पड़ सकता है। इसके लिए सुरक्षित लॉकर या काउंटर की सुविधा देने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि नियमों का सही तरीके से पालन हो सके। रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी प्रतीक जैन ने कहा है कि इस बार नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
आस्था और मर्यादा बनाए रखने की कोशिश
बद्री-केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष विजय कपरवान ने बताया कि समिति की बैठक में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया है कि मंदिर परिसर में मोबाइल और कैमरे पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु यहां आस्था के साथ दर्शन करने आते हैं, लेकिन कुछ लोग इसे कंटेंट बनाने की जगह समझ लेते हैं, जिससे मंदिर की गरिमा प्रभावित होती है। प्रशासन और मंदिर समिति का मानना है कि मोबाइल-फ्री दर्शन से श्रद्धालुओं को शांति मिलेगी और बाबा केदार की परंपरा और मर्यादा बनी रहेगी। अब देखना होगा कि यह सख्त नियम जमीन पर कितना प्रभावी साबित होता है।
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