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डायन बताकर ऐसी सजा! मोतिहारी में महिला के साथ दरिंदगी, पिलाया गया मल, अस्पताल-थाने से लौटी खाली हाथ, फिर…

बिहार के मोतिहारी में एक वृद्ध महिला को डायन बताकर बेरहमी से पीटने और अमानवीय व्यवहार करने का मामला सामने आया है। अस्पताल और थाने से मदद न मिलने पर पीड़िता ने एसपी जनता दरबार में गुहार लगाई

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बिहार के मोतिहारी जिले से एक बार फिर इंसानियत को झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। भोपतपुर थाना क्षेत्र में रहने वाली एक वृद्ध महिला को गांव के ही कुछ लोगों ने डायन बताकर निशाना बनाया। आरोप है कि पहले महिला के साथ बेरहमी से मारपीट की गई और फिर उसके साथ ऐसा अमानवीय व्यवहार किया गया, जिसे सुनकर रूह कांप जाए। पीड़िता के मुताबिक, गांव के शंकर साह के बेटे की गुजरात में मौत हो गई थी। इस दुखद घटना के बाद आरोपी ने महिला पर यह आरोप लगा दिया कि उसी की वजह से उसके बेटे की जान गई है। इसी अंधविश्वास के चलते महिला को डायन बताकर पीटा गया। मारपीट इतनी बुरी थी कि महिला का एक दांत टूट गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गई। गांव में मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे, लेकिन किसी ने महिला को बचाने की हिम्मत नहीं दिखाई। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि आज के दौर में भी समाज के कुछ हिस्सों में अंधविश्वास किस हद तक हावी है।

अस्पताल में इलाज से इनकार, पीड़िता की पीड़ा

मारपीट के बाद घायल वृद्ध महिला किसी तरह खुद को संभालते हुए इलाज के लिए मोतिहारी सदर अस्पताल पहुंची। लेकिन यहां भी उसके साथ इंसानियत नहीं दिखाई गई। आरोप है कि महिला के शरीर पर मैला लगे होने की वजह से अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों ने उसका इलाज करने से मना कर दिया। पीड़िता दर्द से कराहती रही, लेकिन किसी ने उसकी हालत पर तरस नहीं खाया। मजबूरी में महिला को निजी अस्पताल जाना पड़ा, जहां उसका इलाज कराया गया। पीड़िता ने बताया कि उस समय वह शारीरिक दर्द से ज्यादा मानसिक पीड़ा में थी। जिस समाज और सिस्टम से उसे सहारा मिलना चाहिए था, वहीं से उसे निराशा हाथ लगी। अस्पताल से लौटने के बाद महिला की हालत और बिगड़ गई, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और न्याय की आस में आगे बढ़ने का फैसला किया।

थाने में भी नहीं सुनी गई फरियाद

इलाज के बाद पीड़िता ने भोपतपुर थाने पहुंचकर आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करानी चाही। लेकिन यहां भी उसके साथ वही रवैया अपनाया गया, जो अक्सर कमजोर और गरीब लोगों के साथ होता है। महिला का आरोप है कि थाने में उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। न तो उसकी शिकायत सुनी गई और न ही लिखित आवेदन लिया गया। पीड़िता कई घंटों तक थाने के चक्कर काटती रही, लेकिन उसे निराश होकर लौटना पड़ा। एक वृद्ध महिला के लिए यह स्थिति बेहद अपमानजनक और पीड़ादायक थी। गांव में अपमान, अस्पताल में उपेक्षा और थाने में अनसुनी—इन सबके बावजूद महिला ने हार नहीं मानी। उसने तय किया कि वह अपनी बात जिले के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी तक पहुंचाएगी, ताकि उसे इंसाफ मिल सके।

SP दरबार में मिला न्याय, FIR का आदेश

न्याय की आखिरी उम्मीद लेकर पीड़िता मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक के जनता दरबार में पहुंची। यहां उसने पूरी घटना विस्तार से बताई और अपनी पीड़ा साझा की। मामले की गंभीरता को समझते हुए पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने तुरंत संज्ञान लिया। एसपी ने संबंधित थानाध्यक्ष को तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने और आरोपी की गिरफ्तारी के निर्देश दिए। एसपी ने कहा कि डायन बताकर किसी के साथ मारपीट करना और अमानवीय व्यवहार करना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस आदेश के बाद पीड़िता को पहली बार महसूस हुआ कि उसकी आवाज सुनी गई है। यह मामला न सिर्फ एक महिला पर हुए अत्याचार की कहानी है, बल्कि सिस्टम की उन कमियों को भी उजागर करता है, जहां पीड़ित को बार-बार न्याय के लिए भटकना पड़ता है।

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