देश में लगातार बढ़ती बिजली की मांग और कटौती की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. सोमवार को लोकसभा में परमाणु ऊर्जा बिल 2025 पेश किया गया, जिसे ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि यह बिल भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. उनका कहना है कि परमाणु ऊर्जा स्थिर और भरोसेमंद स्रोत है, जो दिन-रात लगातार बिजली उत्पादन करने में सक्षम है. इस बिल के लागू होने से देशभर में 24 घंटे बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और खासतौर पर पीक आवर के दौरान होने वाली कटौती से लोगों को राहत मिलेगी. सरकार का मानना है कि परमाणु ऊर्जा के जरिए देश की ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता दोनों मजबूत होंगी.
सोलर और पवन ऊर्जा को मिलेगा सहारा, होगी 24×7 बिजली
सरकार का फोकस सिर्फ परमाणु ऊर्जा पर ही नहीं है, बल्कि इसे सोलर और पवन ऊर्जा के साथ जोड़कर एक संतुलित ऊर्जा मॉडल तैयार किया जा रहा है. पीयूष गोयल ने कहा कि सोलर और विंड एनर्जी मौसम पर निर्भर होती हैं, इसलिए इनका उत्पादन हर समय समान नहीं रहता. ऐसे में परमाणु ऊर्जा इन दोनों को बैकअप सपोर्ट देगी. जब सोलर या पवन ऊर्जा का उत्पादन कम होगा, तब परमाणु ऊर्जा ग्रिड को स्थिर रखेगी. इसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को मिलेगा, क्योंकि दिन हो या रात, हर समय बिजली उपलब्ध रहेगी. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक पिछले 11 वर्षों में सोलर पावर की उत्पादन क्षमता में 46 गुना बढ़ोतरी हुई है, जो यह दिखाती है कि भारत तेजी से रिन्यूएबल एनर्जी की ओर बढ़ रहा है. परमाणु ऊर्जा इस बदलाव को और मजबूत आधार देगी.
डेटा सेंटर और उद्योगों के लिए खुले नए अवसर
परमाणु ऊर्जा बिल के पारित होने से भारत के लिए एक और बड़ा मौका खुलेगा, वह है डेटा सेंटर हब बनने का. आज के डिजिटल दौर में डेटा सेंटर किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम हो चुके हैं, लेकिन इनके संचालन के लिए भारी मात्रा में और बिना रुकावट बिजली की जरूरत होती है. सरकार का मानना है कि 24 घंटे स्थिर बिजली सप्लाई मिलने से भारत वैश्विक कंपनियों के लिए आकर्षक गंतव्य बन सकता है. पहले से ही देश में डेटा सेंटर स्थापित करने की दिशा में कदम उठाए जा चुके हैं और अब परमाणु ऊर्जा इस योजना को नई रफ्तार देगी. इसके अलावा निजी-सार्वजनिक भागीदारी मॉडल के तहत परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की योजना भी बनाई गई है. इससे न सिर्फ निवेश बढ़ेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और राज्यों को भी आर्थिक फायदा होगा.
बीते 11 सालों की ऊर्जा प्रगति और भविष्य की तैयारी
सरकार ने बीते एक दशक में ऊर्जा क्षेत्र में कई बड़े सुधार किए हैं. पीयूष गोयल ने संसद में बताया कि वर्ष 2014 में देश की पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता करीब 21,000 मेगावाट थी, जो अब बढ़कर 53,000 मेगावाट हो चुकी है. इसी तरह कोयले की उपलब्धता को लेकर भी हालात पहले से काफी बेहतर हुए हैं. एक समय ऐसा था जब कोयले की कमी के कारण कई पावर प्लांट बंद करने पड़ते थे, लेकिन अब पावर प्लांट्स के पास करीब 50 दिनों तक बिजली उत्पादन के लिए पर्याप्त कोयले का स्टॉक मौजूद है. सरकार का कहना है कि परमाणु ऊर्जा बिल इसी दीर्घकालिक सोच का हिस्सा है, ताकि आने वाले वर्षों में बढ़ती आबादी, उद्योगों और तकनीकी जरूरतों को बिना किसी बाधा के पूरा किया जा सके. यह बिल सिर्फ आज की समस्या का समाधान नहीं, बल्कि भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए एक मजबूत आधार तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.
