उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने पत्रकारों की पहचान और व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में सही और वास्तविक पत्रकारों को मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेट और आई कार्ड दिया जाना जरूरी है। इससे न सिर्फ पत्रकारों की पहचान स्पष्ट होगी, बल्कि उन्हें काम के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना भी नहीं करना पड़ेगा।
सीएम योगी का मानना है कि आज के समय में पत्रकारिता के क्षेत्र में कई तरह की चुनौतियां हैं, जिनमें फर्जी पहचान भी एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। ऐसे में एक स्पष्ट और प्रमाणित पहचान प्रणाली पत्रकारों के लिए सुरक्षा और विश्वसनीयता दोनों सुनिश्चित कर सकती है। उन्होंने कहा कि जब पत्रकार कहीं रिपोर्टिंग के लिए जाएंगे, तो उन्हें अपनी पहचान साबित करने में कोई दिक्कत नहीं होगी।
कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा की दिशा में संकेत
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी संकेत दिया कि यदि पत्रकारों की पहचान प्रणाली मजबूत होगी, तो उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ देना भी आसान हो जाएगा। खासतौर पर उन्होंने कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार के लिए ऐसे लाभ उपलब्ध कराना अधिक व्यवस्थित हो सकेगा।
यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से पत्रकार संगठनों की ओर से स्वास्थ्य सुरक्षा और बीमा जैसी सुविधाओं की मांग की जा रही है। सीएम योगी के इस बयान से उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में पत्रकारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कोई ठोस कदम उठाया जा सकता है। हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक योजना घोषित नहीं की गई है, लेकिन संकेत साफ हैं कि सरकार इस दिशा में सोच रही है।
पत्रकारिता के मूल्यों पर जोर
सीएम योगी आदित्यनाथ ने पत्रकारिता के मूल्यों और आचरण को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पत्रकारिता को कभी भी बेलगाम नहीं होने देना चाहिए। यह एक जिम्मेदार पेशा है, जिसमें समाज के प्रति जवाबदेही और नैतिकता बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पत्रकारों को अपने पेशे को केवल खबरों तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए कार्य करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य सिर्फ सूचना देना नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा दिखाना भी है।
200 साल की विरासत और भविष्य की दिशा
मुख्यमंत्री ने भारतीय पत्रकारिता के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले लगभग 200 वर्षों में इस पेशे का मूल भाव हमेशा राष्ट्र सेवा और समाज सेवा रहा है। उन्होंने ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को पत्रकारिता का आधार बताते हुए कहा कि इसी सोच के साथ आगे बढ़ना जरूरी है।
उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे अपने पेशे के आदर्शों और मूल्यों को बनाए रखें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करें। उनके अनुसार, अगर पत्रकारिता अपने मूल उद्देश्य पर कायम रहती है, तो यह देश के विकास और लोकतंत्र को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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