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कस्टडी में मौत का खौफनाक सच! 6 साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला, 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा

तमिलनाडु के चर्चित कस्टडी डेथ केस में मदुरै कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, पिता-बेटे की मौत के मामले में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा।

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तमिलनाडु के चर्चित पिता-बेटे कस्टडी डेथ केस में मदुरै जिला अदालत ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाते हुए नौ पुलिसकर्मियों को मौत की सजा दी है। यह मामला साल 2020 में सामने आया था, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह कोई सामान्य मामला नहीं, बल्कि मानवता को शर्मसार करने वाली घटना है। दोषियों में एक इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और कई पुलिसकर्मी शामिल हैं। अदालत ने यह भी साफ किया कि ऐसे मामलों में सख्त सजा ही समाज में न्याय का संदेश देती है। एक आरोपी इंस्पेक्टर पर 15 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है, जिससे यह साफ है कि कोर्ट इस अपराध को बेहद गंभीर मानता है।

निर्दयता की हदें पार, कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पिता और बेटे के साथ पुलिस हिरासत में जो बर्बरता हुई, उसे पढ़कर ही रूह कांप जाती है। आरोपियों ने दोनों को निर्वस्त्र कर बेरहमी से पीटा, जो कानून और इंसानियत दोनों के खिलाफ है। अदालत ने यह भी कहा कि अगर इस मामले में न्यायिक निगरानी नहीं होती तो शायद सच्चाई कभी सामने नहीं आ पाती। इस केस में सीसीटीवी फुटेज और अन्य अहम सबूत पेश किए गए, जो आमतौर पर ऐसे मामलों में मिलना मुश्किल होता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस फैसले का असर ईमानदार पुलिसकर्मियों पर नहीं पड़ेगा, बल्कि यह केवल दोषियों के खिलाफ एक कड़ा संदेश है।

सीबीआई जांच और सजा की मांग

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय एजेंसी को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में साफ कहा था कि यह एक सोची-समझी हिंसा थी, जिसमें आरोपियों ने अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया। एजेंसी ने अदालत से दोषियों के लिए अधिकतम सजा की मांग की थी, जिसमें फांसी या बिना पैरोल के आजीवन कारावास शामिल था। जांच के दौरान कुल 10 पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से नौ को दोषी करार दिया गया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सबूत मिटाने की भी कोशिश की थी, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों और गवाहों के चलते पूरा सच सामने आ गया।

क्या था पूरा मामला

यह घटना 19 जून 2020 की है, जब एक दुकान चलाने वाले पिता और उनके बेटे को लॉकडाउन नियमों के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें स्थानीय पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की गई। बाद में दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया, लेकिन कुछ ही दिनों के भीतर उनकी मौत हो गई। परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस कस्टडी में हुई पिटाई के कारण उनकी जान गई। इस घटना के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया और न्याय की मांग उठी। आखिरकार, कई सालों की लंबी सुनवाई के बाद अब अदालत का यह फैसला सामने आया है, जिसे न्याय की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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