उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर लोगों का गुस्सा अब खुलकर सड़कों पर दिखाई दे रहा है। रविवार को राजधानी में हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए, जब समूचे विपक्ष के साथ बड़ी संख्या में आम नागरिकों ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस मामले में अब तक कई अहम सवालों के जवाब नहीं मिले हैं और जांच की दिशा पर भी गंभीर संदेह बना हुआ है। हाथों में तख्तियां, आंखों में गुस्सा और जुबान पर न्याय की मांग लिए लोग एक स्वर में नारे लगा रहे थे। “अंकिता को न्याय दो” और “वीआईपी का नाम सामने लाओ” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। प्रदर्शन में युवाओं, महिलाओं और सामाजिक संगठनों की मौजूदगी ने साफ कर दिया कि यह सिर्फ राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि जनभावनाओं का विस्फोट है।
बैरिकेडिंग टूटी, पुलिस से हुई तीखी झड़प
जैसे-जैसे भीड़ आगे बढ़ी, हालात और ज्यादा तनावपूर्ण होते चले गए। प्रदर्शनकारियों ने सीएम आवास की ओर बढ़ते हुए पहली बैरिकेडिंग को तोड़ दिया, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मौके पर तैनात भारी पुलिस बल ने तत्परता दिखाते हुए दूसरी बैरिकेडिंग के पास ही लोगों को रोक लिया। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली, हालांकि स्थिति को काबू में रखा गया। पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है, जबकि प्रदर्शनकारी इसे शांतिपूर्ण जन आंदोलन बता रहे हैं। कई लोगों का कहना था कि जब तक उन्हें न्याय का भरोसा नहीं मिलेगा, तब तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड में नजर आईं।
CBI जांच की मांग और ‘VIP नाम’ बना सबसे बड़ा सवाल
अंकिता भंडारी हत्याकांड में सीबीआई जांच की मांग अब आंदोलन का केंद्र बिंदु बन चुकी है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मामले में एक प्रभावशाली ‘वीआईपी’ का नाम सामने आने के बावजूद अब तक उसका खुलासा नहीं किया गया है। लोगों का कहना है कि इसी कारण जांच पर सवाल उठ रहे हैं और भरोसा कमजोर हो रहा है। विपक्षी दलों ने भी सरकार पर दबाव बनाते हुए कहा कि अगर मामले में निष्पक्ष जांच करानी है तो सीबीआई जांच के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता। आंदोलन में शामिल लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस मांग पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है। आम जनता के बीच यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि सच्चाई को दबाने की कोशिश की जा रही है, जिससे आक्रोश और गहराता जा रहा है।
सरकार पर बढ़ता दबाव, आंदोलन के और तेज होने के संकेत
सीएम आवास के घेराव के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। सरकार पर चौतरफा दबाव बनता नजर आ रहा है, क्योंकि यह मामला अब सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जनविश्वास से जुड़ गया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक अंकिता भंडारी को पूरा न्याय नहीं मिलेगा और हर जिम्मेदार चेहरे को बेनकाब नहीं किया जाएगा, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक रूप ले सकता है। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है, लेकिन सड़कों पर दिख रही भीड़ और गूंजते नारों से साफ है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि एक नए और निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है।
Read more-PM मोदी को लेकर लखनऊ में बड़ा ऐलान, ‘राष्ट्र पुत्र’ की मांग वाले पोस्टरों से मचा हड़कंप
