भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद आनंद शर्मा ने हाल ही में पश्चिम एशिया संकट पर अपनी टिप्पणियों को लेकर उठ रही आलोचना का जवाब दिया। शर्मा पर आरोप लगे थे कि उनकी राय पार्टी की आधिकारिक राय से अलग है। इस पर आनंद शर्मा ने कहा, “पार्टी लाइन क्या होती है? मुझे समझ नहीं आता कि पार्टी की राय की बात कौन कर रहा है। क्या हमें मिलकर पार्टी की राय तय नहीं करनी चाहिए?” उन्होंने सुझाव दिया कि कांग्रेस कार्यसमिति को बैठक कर स्थिति पर विचार-विमर्श करना चाहिए और एक साझा राय बनानी चाहिए। शर्मा की इस प्रतिक्रिया ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उनके इस बयान को लेकर कांग्रेस के अंदर और बाहर दोनों जगह चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सरकार के प्रयासों की सराहना
आनंद शर्मा ने पश्चिम एशिया संकट के दौरान भारत सरकार के प्रयासों की खुले शब्दों में सराहना की। उन्होंने कहा कि संभावित खतरों से निपटते हुए भारत ने परिपक्व और कुशल कूटनीति अपनाई। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भारत को शांति बहाली के लिए ‘ग्लोबल साउथ’ और रणनीतिक साझेदार देशों को एकजुट करने का प्रयास करना चाहिए। उनका मानना है कि वैश्विक स्तर पर स्थिरता बनाए रखना और सहयोग बढ़ाना भारत के हित में है। शर्मा के अनुसार, सरकार की यह पहल न केवल सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी अहम है।
अभूतपूर्व वैश्विक चुनौती का सामना
आनंद शर्मा ने कहा कि ईरान पर अमेरिकी और इजराइल के हमले और उसकी जवाबी कार्रवाई ने पश्चिम एशिया में गंभीर आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल पैदा कर दी है। उन्होंने बताया कि भारत और खाड़ी देश कच्चे तेल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस पर निर्भर हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से सप्लाई प्रभावित होने से भारत समेत कई देशों को अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। शर्मा ने जोर देकर कहा कि यह समय नीतिगत और रणनीतिक निर्णयों की परीक्षा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के 200 अरब डॉलर के व्यापार, एक करोड़ प्रवासियों की सुरक्षा और विदेशी मुद्रा प्रेषण की स्थिरता पर संकट का असर पड़ सकता है।
राष्ट्रीय सहमति और सर्वदलीय बैठक
आनंद शर्मा ने कहा कि भारत की प्रतिक्रिया को राष्ट्रीय सहमति और संकल्प का समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने बताया कि अप्रत्याशित और अस्थिर स्थिति में राजनीतिक दलों के नेतृत्व को स्थिति और नीतिगत निर्णयों से अवगत कराने के लिए सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई।
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश की सुरक्षा और कूटनीति में सभी दलों का सहयोग जरूरी है। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यसमिति को भी इस तरह की स्थितियों पर विचार करना चाहिए और साझा राय बनानी चाहिए ताकि भविष्य में रणनीतिक फैसलों में सबका समर्थन रहे।
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