हरियाणा के फरीदाबाद जिले में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी सोमवार देर रात साइबर हमले का शिकार बन गई। छात्रों और शिक्षकों के लिए बनाई गई इस यूनिवर्सिटी की आधिकारिक वेबसाइट अचानक बंद पड़ी दिखी और कुछ ही देर बाद उस पर एक अजीब सा संदेश उभरा “इस्लामिक जिहाद करने वालों को सलाम…” यह संदेश देखते ही यूनिवर्सिटी प्रशासन में हड़कंप मच गया। कुछ देर के लिए साइट पूरी तरह से ब्लॉक हो गई और फिर अचानक दोबारा एक्सेस में आई, लेकिन तब तक पूरा घटनाक्रम वायरल हो चुका था।
अल-फलाह यूनिवर्सिटी के आईटी विभाग ने सबसे पहले वेबसाइट की लॉग हिस्ट्री और सर्वर डेटा की जांच शुरू की। शुरुआती जांच में सामने आया कि वेबसाइट को विदेशी सर्वर से एक्सेस किया गया था। हैकर्स ने न सिर्फ संदेश डाला बल्कि साइट के कुछ पेजों का डेटा भी बदल दिया।
हरियाणा साइबर सेल ने इस घटना को गंभीर मानते हुए तुरंत फॉरेंसिक जांच शुरू कर दी है। फरीदाबाद पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि “हैकिंग के निशान विदेश के आईपी से जुड़े लग रहे हैं, लेकिन यह भी संभव है कि उन्हें छुपाने के लिए प्रॉक्सी का इस्तेमाल हुआ हो।”
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों को दिलाया भरोसा
घटना के तुरंत बाद अल-फलाह यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। बयान में कहा गया — “हमारे सर्वर पर असामान्य गतिविधि दर्ज की गई थी। वेबसाइट का नियंत्रण अब पूरी तरह से हमारे पास है। किसी भी छात्र या कर्मचारी का व्यक्तिगत डेटा लीक नहीं हुआ है।”
छात्रों में पहले अफरा-तफरी का माहौल था, लेकिन यूनिवर्सिटी के आईटी विभाग ने सुबह तक वेबसाइट को पुनः सामान्य कर दिया। इसके बाद कक्षाओं और ऑनलाइन गतिविधियों को सामान्य रूप से शुरू किया गया।
घटना के कुछ ही घंटों के भीतर “#AlFalahUniversityHacked” हैशटैग ट्विटर (X) पर ट्रेंड करने लगा। कई लोगों ने स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए साइबर सुरक्षा पर सवाल उठाए। कुछ यूज़र्स ने लिखा कि “अगर यूनिवर्सिटी जैसी संस्था की वेबसाइट इतनी आसानी से हैक हो सकती है, तो आम लोगों का डेटा कितना सुरक्षित है?” वहीं कुछ ने इसे “साइबर टेररिज्म” की शुरुआत बताते हुए सरकार से कड़े कदम की मांग की।
क्या किसी आतंकी संगठन का हाथ? जांच में कई एंगल
साइबर सेल के सूत्रों के अनुसार, जांच टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस हैकिंग के पीछे कोई आतंकी या राजनीतिक मकसद तो नहीं था। संदेश में ‘इस्लामिक जिहाद’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था, जिससे मामला संवेदनशील हो गया है।
हालांकि प्रारंभिक जांच में यह तकनीकी रूप से एक “डिफेसमेंट अटैक” बताया जा रहा है — यानी वेबसाइट का लुक और कंटेंट अस्थायी रूप से बदल दिया गया, पर सर्वर का गहरा नुकसान नहीं हुआ। जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि कहीं यह किसी विदेशी साइबर ग्रुप का “टेस्ट अटैक” तो नहीं था।
प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा
अल-फलाह यूनिवर्सिटी के कई छात्रों ने कहा कि इस घटना से वे डर गए हैं। कुछ ने बताया कि वे पहले से ऑनलाइन फीस और आवेदन प्रक्रिया में अपने दस्तावेज़ अपलोड कर चुके हैं। अब उन्हें डेटा सेफ्टी को लेकर चिंता है।
प्रशासन ने कहा कि अब वेबसाइट पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और अतिरिक्त फ़ायरवॉल लेयर लगाई जा रही है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय ने एक स्वतंत्र साइबर ऑडिट टीम को भी बुलाया है जो सर्वर की संपूर्ण सुरक्षा की समीक्षा करेगी।
भारत में पिछले तीन वर्षों में शैक्षणिक संस्थानों की वेबसाइटों पर साइबर हमले तेजी से बढ़े हैं। नेशनल साइबर सिक्योरिटी कोऑर्डिनेशन सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, केवल 2024 में ही 130 से अधिक शैक्षणिक पोर्टल्स पर हैकिंग के प्रयास किए गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादातर संस्थानों की वेबसाइटें पुराने सिक्योरिटी सिस्टम पर चल रही हैं, जिन्हें आधुनिक एन्क्रिप्शन और सर्वर प्रोटेक्शन की जरूरत है।
प्रशासन ने लोगों से की अपील
हरियाणा पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आम लोगों और छात्रों से अपील की है कि किसी भी तरह का भ्रामक संदेश या स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर शेयर न करें। सभी साइबर रिपोर्ट्स की जांच पूरी होने के बाद ही आधिकारिक बयान जारी किया जाएगा।
साथ ही, यह भी कहा गया है कि “डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा अब केवल तकनीकी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बन चुकी है।”
अल-फलाह यूनिवर्सिटी की यह घटना एक चेतावनी बनकर सामने आई है — कि चाहे शैक्षणिक संस्थान हो या सरकारी वेबसाइट, साइबर अपराधी किसी को नहीं छोड़ रहे। एक तरफ जहां तकनीक ने शिक्षा को आधुनिक बनाया है, वहीं दूसरी ओर वही तकनीक अब सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
