ऑस्ट्रेलिया के सिडनी स्थित मशहूर बोंडी बीच पर रविवार रात उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब अचानक गोलियों की आवाज़ गूंजने लगी। यह हमला उस समय हुआ, जब हनुक्का के जश्न के लिए एक हज़ार से अधिक लोग एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मौजूद थे। चश्मदीदों के मुताबिक, लोग कुछ समझ पाते उससे पहले ही गोलियां चलने लगीं और चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। इस भयावह हमले में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद इसे यहूदी समुदाय को निशाना बनाकर किया गया आतंकवादी हमला करार दिया है। घटना के बाद पूरे इलाके को सील कर दिया गया और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। इसी खौफनाक माहौल के बीच एक शख्स ने ऐसा साहस दिखाया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
कैमरे में कैद हुई बहादुरी
इस हमले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति हमलावर की ओर दौड़ता हुआ दिखाई देता है। बाद में इस शख्स की पहचान 43 वर्षीय अहमद अल अहमद के रूप में हुई। वेरिफाइड वीडियो में साफ दिखता है कि अहमद पहले एक खड़ी कार के पीछे छिपे होते हैं और जैसे ही मौका मिलता है, वह हथियारबंद हमलावर पर झपट्टा मारते हैं। अहमद न सिर्फ हमलावर को पकड़ लेते हैं, बल्कि उससे बंदूक भी छीन लेते हैं और उसे ज़मीन पर गिरा देते हैं। इसके बाद वह बंदूक हमलावर की ओर तान देते हैं, जिससे हमलावर पीछे हटने पर मजबूर हो जाता है। कुछ सेकंड बाद अहमद हथियार नीचे रखकर एक हाथ हवा में उठा लेते हैं, ताकि पुलिस यह समझ सके कि वह हमलावर नहीं हैं। यह पूरी घटना कुछ ही पलों में घटी, लेकिन इन्हीं पलों में अहमद ने कई लोगों की जान बचा ली।
साधारण दुकानदार, असाधारण साहस की मिसाल
अहमद अल अहमद कोई सुरक्षा कर्मी या पुलिस अधिकारी नहीं हैं। वह सिडनी में एक छोटी फल की दुकान चलाते हैं और दो बच्चों के पिता हैं। उनके परिवार के अनुसार, अहमद रोज़ की तरह उस दिन भी अपने काम से लौट रहे थे, जब यह हमला हुआ। अहमद के चचेरे भाई मुस्तफ़ा ने मीडिया को बताया कि हमले के दौरान अहमद को दो गोलियां लगीं—एक उनकी बांह में और दूसरी हाथ में। गंभीर चोटों के चलते उनकी सर्जरी की गई और फिलहाल वह अस्पताल में भर्ती हैं। परिवार का कहना है कि अहमद की हालत स्थिर है और डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। मुस्तफ़ा ने भावुक होते हुए कहा कि अहमद ने जो किया, वह किसी भी आम इंसान के बस की बात नहीं होती। उनके मुताबिक, अहमद ने न तो अपनी जान की परवाह की और न ही यह सोचा कि सामने बंदूक है, बस लोगों को बचाने का फैसला लिया।
हमलावर कौन थे और जांच में क्या सामने आया
पुलिस की जांच में सामने आया है कि इस हमले में दो हमलावर शामिल थे, जो आपस में पिता और बेटा थे। उनकी उम्र क्रमशः 50 और 24 साल बताई गई है। पुलिस ने पुष्टि की है कि 50 वर्षीय हमलावर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 24 वर्षीय हमलावर गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। वायरल वीडियो में यह भी देखा गया कि अहमद से हथियार छिनने के बाद हमलावर पीछे हटता है, लेकिन बाद में वह एक और हथियार उठाकर दोबारा फायरिंग करता है। वहीं, एक दूसरा बंदूकधारी भी पुल के ऊपर से लगातार गोलियां चलाता दिखाई देता है। फिलहाल पुलिस यह जांच कर रही है कि हमलावरों के निशाने पर कौन लोग थे और हमले की पूरी साजिश क्या थी। इस बीच अहमद अल अहमद को ऑस्ट्रेलिया समेत दुनियाभर में ‘हीरो ऑफ बोंडी बीच’ कहा जा रहा है। सोशल मीडिया पर लोग उनके साहस को सलाम कर रहे हैं और उनके जल्द स्वस्थ होने की दुआ कर रहे हैं।
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