Thursday, February 26, 2026
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छुट्टियों पर सवाल या प्रशासनिक सख्ती? हिमाचल में IPS अधिकारी की जिम्मेदारियां जूनियर को सौंपे जाने से मचा हलचल

हिमाचल प्रदेश में डीजीपी अशोक तिवारी ने आईपीएस अधिकारी अदिति सिंह की बार-बार छुट्टियों के कारण उनकी जिम्मेदारियां एडिशनल एसपी को सौंप दीं।

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हिमाचल प्रदेश पुलिस महकमे में इन दिनों एक प्रशासनिक आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है। राज्य के पुलिस महानिदेशक Ashok Tiwari ने 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी Aditi Singh की जिम्मेदारियां अस्थायी रूप से उनके जूनियर अधिकारी को सौंपने का आदेश जारी किया है। यह कदम तब उठाया गया जब पाया गया कि वह बीते कुछ हफ्तों में लगातार अवकाश पर रहीं, जिससे विभागीय कामकाज प्रभावित हुआ। आदेश के मुताबिक, यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी निर्देश में स्पष्ट किया गया है कि कार्य में निरंतरता और प्रशासनिक सुचारुता बनाए रखने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। इस फैसले ने पुलिस महकमे के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा को जन्म दे दिया है, क्योंकि किसी आईपीएस अधिकारी की जिम्मेदारियां इस तरह से अधीनस्थ को सौंपना सामान्य घटना नहीं मानी जाती।

25 दिन की छुट्टी और प्रभावित हुआ कार्यालय कार्य

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, Aditi Singh धर्मशाला स्थित स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (SV&ACB) के नॉर्दर्न रेंज में पुलिस अधीक्षक (एसपी) के पद पर तैनात हैं। 8 जनवरी से 22 फरवरी के बीच वह कुल 25 दिनों तक अलग-अलग प्रकार के अवकाश पर रहीं। आदेश में उल्लेख है कि इन छुट्टियों के कारण कार्यालय के नियमित कामकाज पर असर पड़ा। पुलिस विभाग जैसे संवेदनशील संस्थान में लगातार अनुपस्थिति से फाइलों के निस्तारण, जांच की प्रगति और प्रशासनिक निर्णयों में देरी होना स्वाभाविक माना जाता है। यही वजह रही कि वरिष्ठ स्तर पर स्थिति की समीक्षा की गई। बताया गया है कि विभागीय कार्यों की गति बनाए रखने और लंबित मामलों को समय पर निपटाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना आवश्यक समझा गया। इस संदर्भ में जारी आदेश में छुट्टियों का पूरा ब्यौरा भी दर्ज किया गया है, ताकि निर्णय पारदर्शी और रिकॉर्ड आधारित रहे।

एडिशनल एसपी को सौंपी गई अतिरिक्त जिम्मेदारी

डीजीपी के निर्देश के बाद एडिशनल एसपी Brahm Das Bhatia को अगली सूचना तक संबंधित जिम्मेदारियां संभालने को कहा गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कार्य की निरंतरता बनाए रखने के लिए वह आगे भी संबंधित कार्यालय से जुड़े रहेंगे, भले ही एसपी पदाधिकारी उपस्थित हों। प्रशासनिक जानकारों के मुताबिक, इस तरह की व्यवस्था का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि संस्थागत कामकाज को प्रभावित होने से बचाना होता है। यह भी उल्लेख किया गया है कि दिसंबर माह में नैनीताल में आयोजित एक आधिकारिक मिड-करियर इंटरैक्शन कार्यक्रम में भाग लेने के कारण भी वह मुख्यालय से बाहर रही थीं। हालांकि वह कार्यक्रम सेवा संबंधी था, फिर भी लगातार अनुपस्थिति को देखते हुए वरिष्ठ स्तर पर समन्वय की आवश्यकता महसूस की गई। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यह कदम एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है, न कि कोई दंडात्मक कार्रवाई।

प्रशासनिक संदेश और आगे की स्थिति

इस पूरे घटनाक्रम को हिमाचल प्रदेश पुलिस के भीतर प्रशासनिक अनुशासन और जवाबदेही के दृष्टिकोण से देखा जा रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी और सक्रियता किसी भी संवेदनशील विभाग के लिए बेहद अहम होती है, खासकर तब जब वह सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक इकाई जैसी जिम्मेदारी संभाल रहे हों। Ashok Tiwari के इस आदेश को एक स्पष्ट संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है कि विभागीय कार्य में निरंतरता सर्वोपरि है। हालांकि अभी तक इस विषय में संबंधित अधिकारी की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह व्यवस्था स्थायी रूप लेती है या फिर परिस्थितियों के सामान्य होने पर पूर्व स्थिति बहाल की जाती है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि पुलिस महकमे में प्रशासनिक दक्षता और समयबद्ध कार्य को लेकर सख्त रुख अपनाया गया है।

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