साल के अंतिम महीनों में जैसे-जैसे दिसंबर से मार्च का समय नजदीक आता है, वैसे-वैसे केंद्र और राज्य सरकारों के विभागों में टेंडरिंग प्रक्रिया अचानक तेज़ हो जाती है। इसका सबसे बड़ा कारण वित्तीय वर्ष का समापन होता है। हर विभाग को साल की शुरुआत में जो बजट और योजनाओं के लक्ष्य दिए जाते हैं, उन्हें 31 मार्च तक पूरा करना होता है। अगर तय समय तक बजट खर्च नहीं हो पाता, तो अगली बार उस विभाग का बजट कटने का खतरा बढ़ जाता है। इसी दबाव में विभाग लंबित योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए तेजी से टेंडर जारी करते हैं। सड़क निर्माण, भवन मरम्मत, स्कूल-अस्पताल, जल आपूर्ति, बिजली और आईटी प्रोजेक्ट्स जैसे कामों में इस समय सबसे ज्यादा गतिविधि देखने को मिलती है। प्रशासनिक स्तर पर फाइलें तेजी से आगे बढ़ती हैं और टेंडर प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाती है, ताकि पैसा समय पर खर्च हो सके और योजनाएं कागजों से बाहर निकलें।
किन सेक्टरों में निकल रहे हैं सबसे ज्यादा टेंडर
इस समय ई-टेंडर पोर्टलों पर नजर डालें तो साफ दिखता है कि निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े टेंडरों की संख्या सबसे ज्यादा है। सड़क मरम्मत, नई सड़कें, पुल, सरकारी भवन, स्कूल और अस्पतालों के निर्माण से जुड़े ठेके लगातार अपडेट हो रहे हैं। इसके अलावा जल जीवन मिशन के तहत गांवों में पाइपलाइन, पानी की टंकी और सप्लाई सिस्टम से जुड़े टेंडर बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट, शहरी विकास, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और आईटी से जुड़े काम भी तेजी से जारी किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली समेत कई राज्यों के पोर्टल पर रोज नए नोटिस अपलोड हो रहे हैं। खास बात यह है कि कई टेंडर छोटे और मझोले ठेकेदारों को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर काम जल्दी पूरा हो सके और रोजगार भी मिले।
ठेकेदारों के लिए क्यों फायदेमंद होता है साल का आखिरी दौर
साल के अंतिम चरण में जारी होने वाले टेंडरों में कई ऐसे फायदे होते हैं, जो बाकी समय में कम देखने को मिलते हैं। पहला, विभाग समय को लेकर ज्यादा सख्त होते हैं, इसलिए काम शुरू होने में देरी नहीं होती। दूसरा, भुगतान प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज रहती है, क्योंकि विभाग बजट को रोककर नहीं रखना चाहते। तीसरा, जिन ठेकेदारों के दस्तावेज़ पूरे होते हैं और जिनका पिछला रिकॉर्ड ठीक रहता है, उन्हें प्राथमिकता मिलने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि इस दौर में प्रतिस्पर्धा भी काफी बढ़ जाती है, क्योंकि ज्यादातर ठेकेदार इसी समय सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में अनुभव, तकनीकी योग्यता और सही अनुमान के साथ बोली लगाना बेहद जरूरी हो जाता है। जल्दबाजी में बहुत कम रेट भरना बाद में परेशानी का कारण बन सकता है।
सावधानी जरूरी: केवल सरकारी पोर्टल पर ही करें भरोसा
अधिकारियों और विशेषज्ञों की साफ सलाह है कि ठेकेदार किसी भी टेंडर में हिस्सा लेने से पहले केवल संबंधित विभाग के आधिकारिक ई-टेंडर पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी पर ही भरोसा करें। सोशल मीडिया, व्हाट्सएप मैसेज या किसी बिचौलिए के जरिए मिलने वाली सूचनाएं कई बार भ्रामक या फर्जी हो सकती हैं। टेंडर की शर्तें, समयसीमा, सुरक्षा जमा, तकनीकी योग्यता और भुगतान नियमों को ध्यान से पढ़ना बेहद जरूरी है। इसके अलावा समय पर बिड सबमिट करना और सभी जरूरी दस्तावेज अपलोड करना भी उतना ही अहम है। साल का यह आखिरी दौर ठेकेदारों और कंपनियों के लिए बड़ा मौका जरूर है, लेकिन समझदारी और सतर्कता के साथ उठाया गया कदम ही लंबे समय तक फायदा दिला सकता है।
