NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस पर कानूनी और सियासी पारा चढ़ता जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल के वकील एपी सिंह ने जांच एजेंसी और सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने हाल ही में बनाए गए नए कानूनों और फास्ट-ट्रैक कोर्ट की प्रक्रिया को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। वकील का साफ कहना है कि जनता के दबाव और संसद के हंगामे के बीच जिस तरह से जल्दबाजी में कानून बनाए जाते हैं, वे अक्सर न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। इस बयान के सामने आने के बाद शिक्षा जगत और कानूनी गलियारों में एक बार फिर से बहस छिड़ गई है कि क्या जल्दबाजी में न्याय देने की कोशिश कहीं अन्याय का रूप तो नहीं ले रही है।
सबूतों के अभाव का दावा: “न पैसे का लेन-देन, न कोई बरामदगी”
ए पी सिंह ने अपने क्लाइंट्स दिनेश बिवाल और विकास बिवाल को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए दावा किया है कि पुलिस और सीबीआई के पास उनके खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं है। उन्होंने दलील दी कि इस पूरे प्रकरण में न तो किसी तरह की कोई रिकवरी हुई है और न ही कोई मनी ट्रेल (पैसे का लेन-देन) सामने आया है। इसके अलावा आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता कॉल डिटेल, फोटो या वीडियोग्राफी जैसी डिजिटल साक्ष्य भी मौजूद नहीं हैं। वकील के अनुसार, जब सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली, तो बिना किसी ठोस आधार के इन युवकों को उठाकर जेल में डाल दिया गया, जबकि असली दोषी कोई और ही हैं जिन्हें बचाने की कोशिश की जा रही है।
‘जमानत नियम है, जेल अपवाद’: कानूनी सिद्धांतों की अनदेखी का आरोप
न्यायिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों का हवाला देते हुए वकील एपी सिंह ने कहा कि कानून में साफ प्रावधान है कि ‘जमानत एक नियम है और जेल अपवाद है’। यदि कोई आरोपी जमानत की सभी शर्तों को पूरी करता है, तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत राहत मिलनी चाहिए, लेकिन इस मामले में उन सिद्धांतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने याद दिलाया कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने शुरुआती कार्रवाई में 47 लोगों को सस्पेंड किया था और असली पेपर लीक करने वाले तथा उसे आगे पहुंचाने वाले अन्य लोग अलग थे, जिनके पास अधिकारियों की पूरी जानकारी भी मौजूद है। इसके बावजूद उनके मुवक्किलों को बेवजह इस साजिश में घसीटा जा रहा है।
निर्भया केस की तर्ज पर सुनवाई: आगे की कानूनी रणनीति पर नजर
इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 3 अगस्त को तय की गई है, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। वकील एपी सिंह ने इस कानूनी लड़ाई की तुलना बहुचर्चित ‘निर्भया मामले’ की शुरुआत से करते हुए कहा कि हम अभी एक शुरुआती चरण में हैं और हमने उस समय फास्ट-ट्रैक कोर्ट की कार्यवाहियों और उनके नतीजों को बेहद करीब से देखा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जल्दबाजी में उठाए गए कदम न्याय प्रणाली के मूल उद्देश्यों को प्रभावित कर सकते हैं। बहरहाल, बचाव पक्ष का यह रुख इस बात का संकेत देता है कि आगामी सुनवाई में आरोपी पक्ष जमानत और अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए कोर्ट में बेहद कड़ा और धारदार कानूनी मुकाबला पेश करने की तैयारी में है।
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