बीजिंग में हुई एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक बैठक में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष संदेश सौंपा। यह संदेश शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक के इतर दिया गया, जहां दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा हुई।
भारत में कही ये बात
सूत्रों के मुताबिक, पीएम मोदी का यह संदेश क्षेत्रीय स्थिरता, आपसी विश्वास और शांतिपूर्ण सहयोग को लेकर था। भारत ने स्पष्ट किया कि वह चीन के साथ सम्मानजनक और संतुलित रिश्ते चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा। यह संदेश उस समय दिया गया है जब भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा पर तनाव बना हुआ है।
इस दौरान एस. जयशंकर और शी जिनपिंग के बीच जो बातचीत हुई, उसमें व्यापार, सुरक्षा, क्षेत्रीय शांति और वैश्विक राजनीति पर भी चर्चा की गई। भारत ने दो टूक कहा कि सीमा पर स्थिति सामान्य किए बिना द्विपक्षीय संबंधों में पूरी तरह सुधार संभव नहीं है।
पाकिस्तान को लग सकती है मिर्ची!
इस संदेश से पाकिस्तान को जरूर मिर्ची लग सकती है क्योंकि भारत का चीन के साथ संवाद और कूटनीतिक संपर्क ऐसे समय पर हो रहा है जब पाकिस्तान खुद चीन के साथ ‘आल वेदर’ दोस्ती का दावा करता है। भारत का यह रुख बताता है कि वह किसी तीसरे देश के प्रभाव में नहीं आता और अपने हितों के लिए सीधे संवाद करता है।
भारत का यह कदम एक मजबूत कूटनीतिक संकेत है कि वह वैश्विक मंचों पर अपने पड़ोसियों से आंखों में आंखें डालकर बात करने में सक्षम है। चीन को सौंपा गया यह संदेश न केवल संबंधों में नई दिशा देने की कोशिश है, बल्कि भारत की रणनीतिक दृढ़ता का भी परिचायक है।
