अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार सुबह एक ऐसा दावा किया, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान मिडिल ईस्ट की ओर खींच लिया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई है। उन्होंने खामेनेई को “इतिहास के सबसे क्रूर लोगों में से एक” बताया। ट्रंप ने कहा कि यह खबर ईरान के लोगों के लिए बहुत बड़ा मौका है, ताकि वे अपने देश पर फिर से नियंत्रण पा सकें। इस पोस्ट के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया, सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। कई देशों ने हालात पर नजर रखनी शुरू कर दी, क्योंकि अगर यह दावा सच होता है तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। हालांकि, ट्रंप ने अपने दावे के साथ कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया, जिससे इस खबर को लेकर संदेह भी बना हुआ है।
‘ईरानी जनता के लिए बड़ा मौका’ – ट्रंप
अपने बयान में ट्रंप ने कहा कि खामेनेई के साथ ईरान के कुछ और बड़े नेता भी मारे गए हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरानी नेता अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और आधुनिक तकनीक से नहीं बच पाए। ट्रंप के मुताबिक यह कार्रवाई अमेरिका और इजरायल ने मिलकर की है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड और सुरक्षा बलों के कुछ लोग अब खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अभी उन्हें थोड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन आगे उन्हें कड़ी सजा मिलेगी। ट्रंप ने साफ किया कि जब तक मिडिल ईस्ट और दुनिया में शांति नहीं होती, तब तक सैन्य दबाव जारी रहेगा। उनके इस बयान को कई लोग सख्त संदेश के तौर पर देख रहे हैं, तो कुछ लोग इसे सिर्फ राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति मान रहे हैं।
इजरायली सूत्रों का दावा और रॉयटर्स की रिपोर्ट
इस पूरे मामले में एक और बड़ा मोड़ तब आया, जब रॉयटर्स ने एक वरिष्ठ इजरायली अधिकारी के हवाले से खबर दी कि हमले के बाद अली खामेनेई का शव बरामद कर लिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका और इजरायल लंबे समय से ईरान के सर्वोच्च नेता को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रहे थे। हालांकि, इजरायल सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। जानकारों का कहना है कि अगर खामेनेई की मौत की पुष्टि होती है, तो यह मिडिल ईस्ट के इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक होगी। इससे ईरान की राजनीति, क्षेत्रीय तनाव, तेल की कीमतें और वैश्विक सुरक्षा सभी पर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि दुनिया भर की नजरें इस खबर पर टिकी हुई हैं।
ईरान का खंडन और जिंदा होने के संकेत
ट्रंप और इजरायली सूत्रों के दावों के उलट, ईरान की प्रमुख समाचार एजेंसियों ने इस खबर को पूरी तरह से गलत बताया है। ईरानी मीडिया का कहना है कि अली खामेनेई सुरक्षित हैं और सत्ता पर उनकी पकड़ मजबूत बनी हुई है। इसी बीच खामेनेई के एक्स (पहले ट्विटर) अकाउंट से एक पोस्ट भी सामने आया, जिससे यह संकेत मिला कि वे जीवित हैं। पोस्ट में धार्मिक संदेश लिखा गया था, जिसे समर्थकों ने उनकी मौजूदगी का सबूत बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा मामला मनोवैज्ञानिक दबाव, राजनीतिक रणनीति या गलत सूचना का हिस्सा हो सकता है। जब तक ईरान या किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था की ओर से साफ पुष्टि नहीं होती, तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी। फिलहाल, पूरी दुनिया इसी सवाल पर टिकी है—क्या खामेनेई सच में मारे गए हैं या यह सिर्फ शब्दों की जंग है?
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