अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई अहम बातचीत के असफल होने के बाद अब पाकिस्तान की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने कहा कि उनका देश इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था और उसने दोनों देशों को करीब लाने की हर संभव कोशिश की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पाकिस्तान चाहता है कि मौजूदा सीजफायर की अवधि बढ़ाई जाए ताकि शांति वार्ता के लिए बेहतर माहौल तैयार हो सके। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान अभी भी इस मुद्दे को सुलझाने के लिए सक्रिय रहना चाहता है।
सीजफायर बढ़ाने पर जोर, शांति की अपील
Ishaq Dar ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए सीजफायर को आगे बढ़ाना बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि अगर संघर्ष विराम जारी रहता है, तो दोनों पक्षों के बीच बातचीत के लिए रास्ता खुला रहेगा। उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि अमेरिका और ईरान दोनों इस समझदारी को दिखाते हुए सीजफायर का पालन करेंगे। पाकिस्तान का यह रुख दर्शाता है कि वह क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है और किसी भी तरह के सैन्य टकराव से बचना चाहता है।
अमेरिका की सख्त शर्तें बनीं सबसे बड़ी बाधा
सूत्रों के अनुसार, बातचीत के दौरान अमेरिका ने ईरान के सामने कई कड़ी शर्तें रखीं, जिन पर सहमति नहीं बन सकी। अमेरिका चाहता था कि ईरान पूरी तरह से यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपने पास मौजूद लगभग 900 पाउंड यूरेनियम भंडार को देश से बाहर भेजे। इसके अलावा Strait of Hormuz की सुरक्षा और नियंत्रण को लेकर भी अमेरिका का रुख सख्त था। ईरान इन शर्तों को अपने राष्ट्रीय हितों के खिलाफ मानता है, यही वजह रही कि बातचीत किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई और आखिरकार फेल हो गई।
आगे क्या? अनिश्चितता और बढ़ते खतरे
इस असफल वार्ता के बाद क्षेत्र में अस्थिरता की आशंका और बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कोई नया कूटनीतिक प्रयास नहीं हुआ, तो मौजूदा सीजफायर ज्यादा दिन तक टिक नहीं पाएगा। Pakistan ने हालांकि संकेत दिए हैं कि वह आगे भी मध्यस्थता की कोशिश करता रहेगा, लेकिन हालात को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि दोनों देश फिर से बातचीत की मेज पर कब लौटेंगे। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या सीजफायर जारी रहेगा या फिर तनाव एक बार फिर बढ़ेगा।
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