अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए सीजफायर को लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने इसे न केवल एक कूटनीतिक सफलता बताया, बल्कि यह भी कहा कि इससे दुनिया में पाकिस्तान की छवि पूरी तरह बदल गई है। उनके अनुसार, यह 14 दिन का युद्धविराम केवल एक समझौता नहीं बल्कि एक “ऐतिहासिक उपलब्धि” है, जिसने पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाई है। शरीफ ने कहा कि टोक्यो से लेकर लंदन और कुआलालंपुर तक पाकिस्तान की चर्चा हो रही है, जो पहले कभी देखने को नहीं मिली। उनका दावा है कि इस घटनाक्रम ने देश के 24 करोड़ नागरिकों को गर्व का अवसर दिया है और पाकिस्तान अब एक जिम्मेदार मध्यस्थ के रूप में उभरकर सामने आया है।
सीजफायर के पीछे क्या है असली कहानी?
जानकारी के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए दो सप्ताह के युद्धविराम का ऐलान किया था। इस समझौते की एक अहम शर्त होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलना भी थी, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ट्रंप ने इस पहल में पाकिस्तान के योगदान का भी उल्लेख किया, जिससे इस दावे को और बल मिला। इसी कड़ी में पाकिस्तान ने 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों को आमंत्रित किया है, जहां एक स्थायी समाधान की दिशा में बातचीत होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम में कई देशों की भूमिका रही है, लेकिन पाकिस्तान इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के रूप में पेश कर रहा है।
मुनीर बने ‘हीरो’, सेना और सरकार की साझेदारी पर जोर
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस मौके पर पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की जमकर तारीफ की। उन्होंने उन्हें “हीरो” बताते हुए कहा कि उन्होंने न केवल युद्ध के समय बल्कि शांति स्थापित करने में भी अहम भूमिका निभाई है। शरीफ के अनुसार, मुनीर ने राजनीतिक नेतृत्व के साथ मिलकर देश के बड़े हितों के लिए काम किया और यह दिखाया कि सेना और सरकार एक साथ मिलकर किस तरह वैश्विक स्तर पर प्रभाव डाल सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मई 2025 के संघर्ष के दौरान मुनीर की रणनीति ने पाकिस्तान को मजबूती दी और अब यह सीजफायर उसी कूटनीति का विस्तार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान में सेना और सरकार के रिश्तों को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं।
क्या बदलेगा क्षेत्रीय राजनीति का समीकरण?
इस पूरे घटनाक्रम ने दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जहां एक ओर पाकिस्तान खुद को एक उभरती कूटनीतिक ताकत के रूप में पेश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह भूमिका स्थायी होगी या केवल एक अस्थायी अवसर। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस्लामाबाद में होने वाली अगली वार्ता सफल रहती है, तो पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और मजबूती मिल सकती है। हालांकि, आलोचक इसे घरेलू राजनीति को साधने की कोशिश भी मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह सीजफायर केवल एक अस्थायी राहत है या वास्तव में क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा।
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