पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच चल रहे तनाव ने अब खतरनाक मोड़ ले लिया है। अफगानिस्तान की सत्ता संभाल रहे Taliban ने दावा किया है कि उसकी वायु सेना ने पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान वायुसेना का प्रमुख ठिकाना Nur Khan Airbase भी शामिल बताया गया है। अफगान रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह कार्रवाई सटीक योजना के तहत की गई और निशाने पर मौजूद ठिकानों को नुकसान पहुंचाया गया है। इस दावे के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन हमलों को लेकर आधिकारिक और विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं।
कई सैन्य ठिकानों को टारगेट करने का दावा
अफगान रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि हमले सिर्फ एक एयरबेस तक सीमित नहीं थे। रावलपिंडी के अलावा बलूचिस्तान के क्वेटा में स्थित 12वीं डिवीजन के मुख्यालय और खैबर पख्तूनख्वा के मोहम्मंद इलाके में ख्वाजाई कैंप को भी निशाना बनाया गया। मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों का मकसद पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को जवाब देना था। बयान में यह भी कहा गया कि शुरुआती आकलन के मुताबिक लक्षित ठिकानों को काफी नुकसान हुआ है। अफगानिस्तान ने दावा किया कि पाकिस्तान ने हाल ही में काबुल और बगराम जैसे इलाकों में हवाई हमले किए थे, जिनके जवाब में यह कार्रवाई की गई। इन घटनाओं से साफ है कि दोनों देशों के बीच टकराव अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सैन्य स्तर पर खुलकर सामने आ चुका है।
सीमा पर बढ़ता तनाव और क्षेत्रीय चिंता
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा विवाद और सुरक्षा मुद्दे लंबे समय से चले आ रहे हैं। दोनों देशों के बीच ड्यूरंड लाइन को लेकर भी मतभेद रहे हैं। हाल के महीनों में सीमा पार से हमलों और घुसपैठ के आरोपों ने संबंधों को और खराब किया है। अब जब खुले तौर पर हवाई हमलों के दावे हो रहे हैं, तो पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष और बढ़ा तो इसका असर दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति पर पड़ सकता है। पाकिस्तान के लिए नूर खान एयरबेस जैसे ठिकाने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं, इसलिए ऐसे ठिकानों को निशाना बनाना बड़ा संदेश माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है, क्योंकि दोनों देश पहले से ही आंतरिक और बाहरी चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
आगे क्या? क्या बढ़ेगी जंग की आग
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब आगे क्या होगा। क्या पाकिस्तान जवाबी कार्रवाई करेगा या कूटनीतिक रास्ता अपनाएगा? अभी तक दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ दिख रही है। अगर हालात नहीं संभले तो सीमा पर बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे समय में शांति और बातचीत की जरूरत सबसे ज्यादा है। दोनों देशों की जनता पहले ही आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों से जूझ रही है, ऐसे में लंबी जंग किसी के हित में नहीं होगी। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह तनाव सीमित रहेगा या खुली जंग का रूप ले लेगा। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह संघर्ष कितनी दूर तक जाता है।
