पश्चिम एशिया से आ रही खबरों ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। सोमवार की सुबह जब दुनिया जाग रही थी, तब ईरान के नतंज परमाणु केंद्र से उठते धुएं के गुबार ने एक नए और भीषण युद्ध का ऐलान कर दिया। ईरान ने आधिकारिक बयान जारी कर सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल पर अपने परमाणु ठिकानों को नष्ट करने का आरोप लगाया है। यह हमला महज़ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि दशकों से चल रहे तनाव का वो विस्फोटक मोड़ है, जिसकी आशंका से दुनिया हमेशा डरती थी। इस समय तेहरान से लेकर तेल अवीव तक केवल सायरन और मिसाइलों की गूँज सुनाई दे रही है।
‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’: जब आसमान से बरसी मौत
ईरान के राजदूत ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को भेजी गई अपनी आपातकालीन रिपोर्ट में दावा किया है कि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर उनके सबसे सुरक्षित माने जाने वाले परमाणु संवर्धन परिसर ‘नतंज’ पर घातक हमला किया है। अमेरिका ने इस सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ का नाम दिया है, जबकि इजरायली वायुसेना इसे ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ के तहत अंजाम दे रही है। सूत्रों के मुताबिक, यह हमला इतना सटीक था कि परमाणु संयंत्र के मुख्य हिस्से को भारी नुकसान पहुँचा है। हालांकि, IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने अभी तक किसी बड़े रेडियोधर्मी रिसाव की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि युद्ध की तीव्रता के कारण वे ग्राउंड ज़ीरो पर मौजूद अपने निरीक्षकों से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं।
नेतृत्व का खात्मा और ईरान में मची अफरा-तफरी
इस पूरे हमले की सबसे चौंकाने वाली और डरावनी खबर ईरान के शीर्ष नेतृत्व को लेकर आ रही है। अपुष्ट रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय खुफिया एजेंसियों के हवाले से खबर है कि इस सर्जिकल स्ट्राइक और हवाई हमलों की ज़द में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कई बड़े कमांडर भी आ गए हैं। ईरान के भीतर इस समय भारी अराजकता का माहौल है और शासन की कमान किसके हाथ में है, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है। ईरानी रेड क्रिसेंट के अनुसार, राजधानी तेहरान सहित लगभग 131 शहरों में हुए हमलों में अब तक 555 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें सैनिक और नागरिक दोनों शामिल हैं।
ईरान का पलटवार और खाड़ी देशों में खलबली
हमले के तुरंत बाद ईरान ने भी अपनी चुप्पी तोड़ी और भीषण जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। ईरान ने अपनी ‘फतेह’ और ‘खैबर’ मिसाइलों का रुख इजरायल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों की ओर कर दिया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत और कतर में स्थित अमेरिकी बेस पर मिसाइलें गिरने की खबरें हैं, जिसके बाद पूरे मिडिल ईस्ट का हवाई क्षेत्र बंद कर दिया गया है। उधर, लेबनान से हिजबुल्लाह ने भी इजरायल के उत्तरी हिस्से पर हजारों रॉकेट दागकर इस युद्ध में औपचारिक रूप से प्रवेश कर लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से दिए अपने संबोधन में स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई ‘आतंक के गढ़’ को खत्म करने के लिए है और उन्हें उम्मीद है कि यह अभियान एक महीने के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट और भारत की चिंता
इस युद्ध की आग केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी अपनी चपेट में ले लिया है। हमले की खबर फैलते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छूने लगी हैं, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों में महंगाई का बड़ा खतरा पैदा हो गया है। भारतीय शेयर बाजार में भी आज भारी गिरावट देखी गई है, जहाँ सेंसेक्स और निफ्टी बुरी तरह टूट गए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय इस समय ईरान में फंसे हजारों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है और एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष अगले 48 घंटों में नहीं थमा, तो यह एक पूर्ण परमाणु युद्ध या तीसरे विश्व युद्ध में तब्दील हो सकता है।
