28 फरवरी 2026 को मिडिल ईस्ट में हालात अचानक बेहद गंभीर हो गए। इजरायल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई, जिसे ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ कहा जा रहा है, के बाद तनाव ने खतरनाक मोड़ ले लिया। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइल हमले किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और कतर के कुछ इलाकों में धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इन हमलों के बाद पूरे क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए हैं और कई उड़ानों को अस्थायी रूप से रोका गया। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी इसका असर दिखा, जहां तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि शक्ति प्रदर्शन का संकेत भी है।
ईरान की चेतावनी और अयातुल्ला अली खामेनेई का संदेश
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई पहले ही संकेत दे चुके थे कि अगर ईरान की जमीन पर हमला हुआ तो उसका जवाब सीमित नहीं रहेगा। ईरान ने स्पष्ट किया था कि जिन देशों ने अमेरिकी सेना को अपने यहां ठिकाने दिए हैं, वे भी संभावित निशाने पर हो सकते हैं। विश्लेषकों के मुताबिक, यह रणनीति ईरान की क्षेत्रीय नीति का हिस्सा है, जिसमें वह सीधे टकराव के बजाय अपने प्रभाव क्षेत्र का इस्तेमाल करता है। दुबई और मनामा के बाहरी इलाकों में धमाकों की खबरों के बाद स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा दी है। हालांकि कई मिसाइलों को पैट्रियट जैसे रक्षा सिस्टम ने हवा में ही रोक लिया, लेकिन इस घटनाक्रम ने निवेशकों और पर्यटकों के बीच डर का माहौल बना दिया है। ईरान की ओर से जारी बयानों में कहा गया है कि यह जवाब लंबा चल सकता है और इसे सीमित संघर्ष नहीं समझा जाना चाहिए।
ट्रंप और नेतन्याहू की कड़ी प्रतिक्रिया
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने पहले दावा किया था कि उनकी सख्त नीति के कारण ईरान दबाव में है, लेकिन हालिया घटनाओं ने हालात को और जटिल बना दिया है। वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इजरायल अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। इजरायल ने संकेत दिया है कि यदि हमले जारी रहे तो और कड़ी सैन्य कार्रवाई की जा सकती है। इस बयानबाजी ने तनाव को और बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बात को लेकर चिंतित है कि कहीं यह टकराव पूर्ण युद्ध में न बदल जाए। संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संगठनों ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
क्या मिडिल ईस्ट बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है?
मौजूदा हालात ने पूरे मिडिल ईस्ट को अस्थिर कर दिया है। संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, कुवैत, कतर, ओमान, सऊदी अरब, जॉर्डन और इराक जैसे देशों में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति पहले से ही रही है। ऐसे में किसी भी हमले का असर सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहता। तेल आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण होंगे। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो यह संघर्ष और गहरा सकता है। फिलहाल सभी देश अपनी-अपनी सुरक्षा मजबूत कर रहे हैं और स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह संकट बातचीत से सुलझेगा या मिडिल ईस्ट एक बड़े युद्ध की ओर बढ़ेगा।
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