मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान ने आधिकारिक तौर पर आरजीसी नौसेना कमांडर अलीरेजा तंगसिरी की मौत की पुष्टि की है। तंगसिरी को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा रणनीति का मास्टरमाइंड माना जाता था और उन्होंने इस पद पर 2018 से काम किया। हाल ही में इजरायल ने दावा किया था कि बंदर अब्बास में हुए लक्षित ऑपरेशन में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं, जिनसे वह बच नहीं पाए। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस हमले में तंगसिरी की मौत के साथ ही उनकी भूमिका और अनुभव का खामियाजा खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर पड़ा।
तंगसिरी का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अहम योगदान
अलीरेजा तंगसिरी को ईरानी नौसेना का रणनीतिक स्तंभ माना जाता था। उनके नेतृत्व में ईरान ने खाड़ी युद्ध में अमेरिकी और इजरायली जहाजों को चुनौती दी थी। विशेषज्ञों के अनुसार तंगसिरी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा व्यवस्था और रणनीतिक ऑपरेशन को डिजाइन किया था, जिससे इस जलडमरूमध्य के जरिए आने-जाने वाली अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को नियंत्रित किया जा सके। 26 मार्च को हुए इजरायली हमले में गंभीर रूप से घायल हुए तंगसिरी का इलाज असफल रहा और उनके निधन ने ईरानी नौसेना में शून्य पैदा कर दिया।
ईरान में हाई-प्रोफाइल हत्याओं का सिलसिला
यह पहला मामला नहीं है जब इस जंग में ईरान के वरिष्ठ नेता और सैन्य अधिकारी मारे गए हैं। फरवरी और मार्च में कई प्रमुख हस्तियों की मौत हुई।
सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को हवाई हमले में मौत हो गई थी।
सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी 17 मार्च को मारे गए।
खुफिया मंत्री इस्माइल खतीब 18 मार्च को हमले में मारे गए।
आईआरजीसी के कमांडर इन चीफ मोहम्मद पाकपुर, वायुसेना अधिकारी अजीज नासिरजादेह, और सशस्त्र बल के चीफ ऑफ स्टाफ अब्दुल रहीम मौसवी भी इसी समयावधि में हत्याओं का शिकार हुए।
इन सभी हत्याओं ने ईरान की सैन्य और राजनीतिक स्थिरता पर गहरा प्रभाव डाला है।
इजरायल का दावा और अमेरिका के प्रभाव
इजरायल ने तंगसिरी की मौत को अपने लक्षित ऑपरेशन का परिणाम बताया। इस कदम को अमेरिका के लिए भी रणनीतिक झटका माना जा रहा है क्योंकि खाड़ी में अमेरिकी सेना और इजरायल के सहयोग पर निर्भरता बनी हुई थी। इजरायली रक्षामंत्री काट्ज़ ने कहा कि तंगसिरी ईरान के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ऑपरेशन के लिए जिम्मेदार थे और उनकी मृत्यु अमेरिका और इजरायल के खाड़ी अभियानों को प्रभावित कर सकती है। विश्लेषकों के अनुसार, ईरानी नौसेना का यह नुकसान खाड़ी में अमेरिका और इजरायल के लिए तत्काल रणनीतिक चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
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