मध्य पूर्व में जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान ने अमेरिका की 18 बड़ी टेक और कॉर्पोरेट कंपनियों को निशाना बनाने की खुली चेतावनी दी है। यह धमकी ऐसे समय में आई है जब दोनों देशों के बीच पहले से ही सैन्य और कूटनीतिक तनाव चरम पर है। ईरान के इस कदम से साफ संकेत मिल रहे हैं कि संघर्ष अब सिर्फ युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि साइबर और कॉर्पोरेट सेक्टर तक भी फैल सकता है।
IRGC का बड़ा बयान, कंपनियों में बढ़ी चिंता
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अपने बयान में कहा है कि अगर ईरानी नेताओं पर हमले जारी रहे, तो वे अमेरिकी कंपनियों की यूनिट्स को निशाना बनाएंगे। IRGC ने यहां तक कहा कि इन कंपनियों में काम कर रहे कर्मचारियों को अपनी सुरक्षा के लिए कार्यस्थल छोड़ देना चाहिए। इस बयान के बाद वैश्विक कॉर्पोरेट जगत में चिंता का माहौल बन गया है, क्योंकि यह सीधे तौर पर निजी सेक्टर को युद्ध की चपेट में लाने जैसा है।
अमेरिका का जवाब—’हर हमले के लिए तैयार’
ईरान की इस चेतावनी पर अमेरिका ने सख्त प्रतिक्रिया दी है। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी सेना पहले भी ईरान के किसी भी हमले को रोकने के लिए तैयार थी और आगे भी रहेगी। उन्होंने दावा किया कि हाल के समय में ईरान के बैलेस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों में भारी कमी आई है, जो अमेरिका की रक्षा क्षमता को दर्शाता है। इस बयान से साफ है कि अमेरिका किसी भी खतरे को हल्के में लेने के मूड में नहीं है।
किन कंपनियों पर है खतरा और क्यों?
ईरान ने जिन 18 कंपनियों को निशाने पर रखा है, उनमें टेक्नोलॉजी और फाइनेंस सेक्टर की दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। ईरान का आरोप है कि ये कंपनियां अमेरिका और इजरायल की सैन्य व खुफिया एजेंसियों की मदद करती हैं और साइबर हमलों में शामिल हैं। यही वजह है कि अब इन्हें सीधे टारगेट किया जा रहा है। इस घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आने वाले दिनों में साइबर हमले एक बड़े युद्ध का हिस्सा बन सकते हैं।
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