अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump पर ईरान में चल रही जंग के बीच अमेरिका के अंदर राजनीतिक दबाव बढ़ता जा रहा है। व्हाइट हाउस के अंदर और बाहर दोनों तरफ उनकी स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई है। ट्रंप ने “रिजीम चेंज” की रणनीति अपनाते हुए ईरान में सख्त कदम उठाने की कोशिश की, लेकिन अमेरिका में उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच प्रतिक्रिया मिली-जुली रही। हाल ही में अटॉर्नी जनरल पाम बॉन्डी को हटाने के बाद भी कैबिनेट में फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब यह सवाल उठता है कि क्या ट्रंप अपनी टीम में बदलाव करके हालात संभाल पाएंगे या यह उनके लिए राजनीतिक संकट बन जाएगा।
जनता का गुस्सा और आर्थिक दबाव
ईरान में जंग के चलते अमेरिकी जनता में चिंता बढ़ गई है। पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दाम और महंगाई ने लोगों की नाराजगी को और बढ़ा दिया है। हालिया सर्वेक्षणों के अनुसार ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग केवल 36% तक गिर गई है, जो उनके कार्यकाल में सबसे कम है। अमेरिका में करीब 60% लोग इस जंग के खिलाफ हैं और लंबी लड़ाई के आर्थिक असर से भयभीत हैं। ऐसे में जनता का विरोध और बढ़ती महंगाई ट्रंप के लिए चुनौती बन गई है। व्हाइट हाउस के अंदर अधिकारियों का मानना है कि जनता और मीडिया की निगरानी में यह दबाव और बढ़ सकता है।
कैबिनेट में संभावित बदलाव
व्हाइट हाउस के अंदर ट्रंप की टीम पर भी दबाव बढ़ रहा है। नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड और कॉमर्स सेक्रेटरी हॉवर्ड लुटनिक जैसे बड़े नामों की कुर्सी खतरे में मानी जा रही है। ट्रंप पिछले समय से गबार्ड के काम से संतुष्ट नहीं हैं और उनके विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, राष्ट्रपति ने यह स्पष्ट किया है कि वह बड़े पैमाने पर बदलाव नहीं चाहते, बल्कि “छोटे लेकिन असरदार बदलाव” करके अपनी सरकार को सक्रिय दिखाने की रणनीति पर हैं। व्हाइट हाउस के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में टारगेटेड बदलाव ही संभव हैं।
मीडिया और संदेश का असर
ट्रंप मीडिया पर भी नाराज हैं। उनका मानना है कि ईरान जंग को लेकर मीडिया उन्हें गलत तरीके से पेश कर रहा है। हाल ही में राष्ट्र के नाम संबोधन देने के बावजूद जनता पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ा। ट्रंप ने टीम से कहा है कि उन्हें ज्यादा सकारात्मक खबरों की जरूरत है। उनका संदेश साफ है – हालात कठिन हैं, लेकिन सरकार कार्रवाई कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के सामने अब दो विकल्प हैं: टीम में बदलाव करके नई शुरुआत करना या मौजूदा टीम के साथ हालात संभालना। दोनों विकल्प उनके राजनीतिक भविष्य के लिए निर्णायक साबित होंगे।
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