मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच चीन ने खुलकर ईरान का समर्थन किया है और अमेरिका को साफ चेतावनी दी है कि वह दूसरे देशों के मामलों में हस्तक्षेप न करे। चीन के इस बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। बीजिंग की ओर से कहा गया कि क्षेत्रीय मुद्दों को बाहरी दबाव से नहीं बल्कि आपसी बातचीत से हल किया जाना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है जब खाड़ी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ रही हैं और कई देशों के बीच तनाव चरम पर है।
होर्मुज को लेकर बढ़ा विवाद
हाल के घटनाक्रम में Donald Trump के नेतृत्व में अमेरिका द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में सख्ती बढ़ाने के संकेत दिए गए हैं। इसे लेकर चीन ने चिंता जताई है और कहा है कि इस तरह के कदम वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का एक बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल की सप्लाई होती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का टकराव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
आर्थिक और रणनीतिक हितों से जुड़ा मामला
चीन लंबे समय से Iran के साथ व्यापारिक और ऊर्जा संबंध बनाए हुए है। इसलिए वह इस पूरे मुद्दे को केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक नजरिए से भी देख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति और बिगड़ती है तो तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार अस्थिर हो सकते हैं। यही कारण है कि चीन लगातार शांति और बातचीत की बात कर रहा है, ताकि हालात नियंत्रण में रहें और वैश्विक स्तर पर किसी बड़े संकट से बचा जा सके।
कूटनीति या टकराव—दुनिया की नजरें आगे के घटनाक्रम पर
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आगे क्या होगा। United States और Iran के बीच पहले से ही तनाव बना हुआ है, और अब China के खुलकर सामने आने से समीकरण और जटिल हो गए हैं। अगर कूटनीतिक बातचीत सफल नहीं होती, तो यह टकराव बड़े संकट का रूप ले सकता है। फिलहाल सभी देश हालात पर नजर बनाए हुए हैं और उम्मीद की जा रही है कि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाएगा।
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